उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) महेंद्र बाबू गुप्ता की निजी कार में तोड़फोड़ की घटना ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। यह मामला केवल एक वाहन को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा, परिवहन विभाग में कथित दलालों की सक्रियता और अवैध वसूली जैसे गंभीर सवाल भी उठ खड़े हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, एआरटीओ महेंद्र बाबू गुप्ता 9 जून की रात प्रवर्तन दल के साथ नियमित वाहन चेकिंग अभियान पर निकले थे। देर रात तक चली कार्रवाई के बाद जब वह लगभग दो बजे अपने आवास पर लौटे, तो उनकी निजी इनोवा कार क्षतिग्रस्त अवस्था में खड़ी मिली। कार के कई हिस्सों में तोड़फोड़ की गई थी, जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि वाहन को जानबूझकर निशाना बनाया गया है।
घटना के बाद एआरटीओ ने तत्काल डायल-112 को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त वाहन का निरीक्षण करते हुए साक्ष्य एकत्र किए। वाहन की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई ताकि जांच में मदद मिल सके।
इसके बाद महेंद्र बाबू गुप्ता ने गौरीगंज कोतवाली में लिखित तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। अपनी शिकायत में उन्होंने परिवहन कार्यालय के बाहर सक्रिय कुछ कथित दलालों पर संदेह जताया। उनका कहना है कि कार्यालय परिसर के आसपास लंबे समय से कुछ बाहरी लोग सक्रिय हैं, जो आम नागरिकों से अवैध वसूली करते हैं और अधिकारियों से संबंध होने का दावा कर लोगों को गुमराह करते हैं।
एआरटीओ के मुताबिक, उन्होंने पूर्व में कथित दलाल मोहित सिंह और उसके सहयोगियों से इस संबंध में पूछताछ की थी। उस दौरान उन्हें अभद्र भाषा का सामना करना पड़ा था और कथित तौर पर धमकियां भी दी गई थीं। ऐसे में उन्हें आशंका है कि उनकी कार में हुई तोड़फोड़ उसी का परिणाम हो सकती है।
इस घटना के सामने आने के बाद परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी चिंता का माहौल है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि कानून लागू कराने वाले अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा।
फिलहाल गौरीगंज कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकारी कार्यालयों के आसपास सक्रिय अवैध तंत्र पर प्रभावी अंकुश लगाने की आवश्यकता है, ताकि न केवल आम जनता बल्कि ईमानदारी से काम कर रहे अधिकारी भी सुरक्षित माहौल में अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।