उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में सिंचाई व्यवस्था को लेकर किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आई है। धान की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले समय में नहरों में पानी न पहुंचने से किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इसी समस्या को लेकर मंगलवार को महिला किसान नेता रीता सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला किसानों और ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया और तत्काल नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग उठाई।
किसानों का कहना है कि धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है और खेतों में रोपाई का कार्य शुरू होने वाला है, लेकिन नहरें सूखी पड़ी हैं। ऐसे में किसानों के सामने सिंचाई की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश किसान नहरों के पानी पर निर्भर रहते हैं। समय पर पानी न मिलने से खेती की लागत बढ़ रही है और फसल उत्पादन पर भी खतरा मंडरा रहा है।
प्रदर्शनकारी किसान शारदा सहायक खंड-49 सिंचाई विभाग कार्यालय पहुंचे और विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने आरोप लगाया कि हर वर्ष इसी तरह की समस्या सामने आती है, लेकिन विभाग समय रहते कोई ठोस व्यवस्था नहीं करता। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
महिला किसान नेता रीता सिंह ने कहा कि धान की खेती के लिए जून का महीना बेहद अहम होता है। यदि इस समय खेतों तक पानी नहीं पहुंचता है तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही के कारण किसानों को निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है। डीजल पंप और ट्यूबवेल के जरिए सिंचाई करने से किसानों का खर्च कई गुना बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ता है।
किसानों ने यह भी कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाएं भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। यदि नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाए तो किसानों को अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा और फसल उत्पादन भी बेहतर होगा।
प्रदर्शन के बाद किसानों ने अधिशासी अभियंता को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में नहरों में तत्काल पानी छोड़े जाने, सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने और किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की गई। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
अमेठी जिले में हजारों किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में सिंचाई संकट का असर सीधे उनकी आजीविका पर पड़ सकता है। फिलहाल किसान विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो यह मुद्दा बड़ा किसान आंदोलन का रूप ले सकता है।