26 मई 2026

अमेठी में लेखपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप, पैसे न देने पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की शिकायत

लेखक न्यूज़ डेस्क · 26 मई 2026, 14:28

अमेठी में लेखपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप, पैसे न देने पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की शिकायत

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले की मुसाफिरखाना तहसील से भ्रष्टाचार और दबाव का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने क्षेत्रीय लेखपाल पर 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने और रकम न देने पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाया है। मामला सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है और पीड़िता प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रही है।

जानकारी के अनुसार मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र के देवकली गांव निवासी सनिना बानो ने जिलाधिकारी अमेठी को शिकायती पत्र सौंपकर लेखपाल गंगा प्रसाद मिश्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि वह अपनी जमीन, गाटा संख्या 30, पर निर्माण कार्य करा रही थीं। इसी दौरान क्षेत्रीय लेखपाल ने उनसे 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।

सनिना बानो के मुताबिक उन्होंने रिश्वत देने से साफ इनकार कर दिया। आरोप है कि इसके बाद लेखपाल ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। पीड़िता का कहना है कि लेखपाल ने उनके निर्माण कार्य को गलत बताते हुए उसे दूसरे गाटा संख्या 20 में अवैध निर्माण दिखा दिया और फिर उनके खिलाफ थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करा दिया।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी ही जमीन पर निर्माण कार्य कराया है और इसमें किसी प्रकार की अवैधता नहीं है। उनका कहना है कि रिश्वत न देने की वजह से उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है। अब उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी लेखपाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि तहसील स्तर पर भ्रष्टाचार और दबाव की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। लोगों का आरोप है कि कई बार आम नागरिकों को सरकारी काम कराने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है, क्योंकि सरकारी कर्मचारी पर रिश्वत मांगने और फर्जी मुकदमा दर्ज कराने जैसे आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

वहीं जिला प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पीड़िता सनिना बानो का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह सिर्फ अपनी जमीन पर निर्माण करा रही थीं और उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से न्याय की अपील की है।

यह मामला एक बार फिर सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और आम लोगों की परेशानियों को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है कि आखिर इस मामले में क्या सच सामने आता है और पीड़िता को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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