अमेठी जिले के विकासखंड शुकुल बाजार में आयोजित SIS सिक्योरिटी कंपनी के रोजगार शिविर में फीस को लेकर हुए विवाद ने रोजगार मेले के संचालन पर सवाल खड़े कर दिए। नौकरी की उम्मीद लेकर पहुंचे सैकड़ों युवाओं के बीच उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब कुछ अभ्यर्थियों ने कंपनी पर धनराशि लेने और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया। विवाद इतना बढ़ गया कि भर्ती प्रक्रिया को बीच में ही रोकना पड़ा और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, SIS सिक्योरिटी कंपनी द्वारा शुकुल बाजार क्षेत्र में रोजगार शिविर आयोजित किया गया था, जहां बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा सुरक्षा कर्मी के पदों के लिए आवेदन और चयन प्रक्रिया में भाग लेने पहुंचे थे। इसी दौरान मुसाफिरखाना क्षेत्र के कुछ युवकों ने आरोप लगाया कि उनसे नौकरी दिलाने के नाम पर धनराशि ली गई, लेकिन उन्हें प्रक्रिया और शुल्क से संबंधित पूरी जानकारी नहीं दी गई।
युवाओं का कहना था कि रोजगार के नाम पर उनसे आर्थिक बोझ डाला जा रहा है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता नहीं दिखाई गई। आरोपों के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने रोजगार शिविर स्थल पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
विरोध प्रदर्शन के कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई और रोजगार मेले को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। इससे उन सैकड़ों युवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा जो नौकरी की उम्मीद लेकर वहां पहुंचे थे। कई अभ्यर्थियों को बिना प्रक्रिया पूरी किए वापस लौटना पड़ा, जिससे उनमें निराशा देखी गई।
स्थिति बिगड़ती देख डायल-112 पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। बाद में दोनों पक्षों को थाना बाजार शुकुल लाया गया, जहां पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में बातचीत कराई गई। लंबी चर्चा के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और मामला शांत कराया गया।
वहीं SIS सिक्योरिटी कंपनी के प्रतिनिधियों ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया। कंपनी का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार संचालित की जाती है। कंपनी के अनुसार अभ्यर्थियों से केवल निर्धारित 350 रुपये पंजीकरण शुल्क और 10,500 रुपये प्रशिक्षण शुल्क लिया जाता है, जिसकी जानकारी पहले से उपलब्ध कराई जाती है। कंपनी ने दावा किया कि किसी भी अभ्यर्थी के साथ धोखाधड़ी नहीं की गई है।
इस घटना ने रोजगार मेलों की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों को दी जाने वाली जानकारी को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार शिविरों में शुल्क, प्रशिक्षण और चयन प्रक्रिया से जुड़ी सभी जानकारियां स्पष्ट रूप से सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि किसी प्रकार का भ्रम पैदा न हो।
फिलहाल मामला शांत हो चुका है, लेकिन इस विवाद ने रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के बीच कई सवाल छोड़ दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भविष्य में ऐसे शिविरों की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि युवाओं का भरोसा कायम रहे और रोजगार के अवसर विवादों की भेंट न चढ़ें।