उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस, परिवार और पूरे इलाके को हैरान कर दिया। जिस युवक को मृत मानकर उसके अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक की सभी रस्में पूरी कर दी गई थीं, वह तेरहवीं के अगले ही दिन अचानक जिंदा घर लौट आया। इस घटना के बाद कथित हत्या के मामले में बड़ा मोड़ आ गया है और पुलिस अब दर्ज हत्या के मुकदमे को समाप्त करने की तैयारी कर रही है।
मामला गाजियाबाद के कौशांबी और मसूरी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, गिरधर किसी मामले में कौशांबी थाना पुलिस द्वारा जेल भेजे गए थे। जेल में रहने के दौरान उनकी मां देवकी देवी और बहनें आशा एवं लता उनसे मिलने गई थीं और उन्हें खर्च के लिए 3400 रुपये देकर लौटी थीं। कुछ समय बाद गिरधर को जमानत मिल गई और वह जेल से रिहा हो गए।
गुमशुदगी के बाद नहर में मिला अज्ञात शव
जेल से बाहर आने के बाद गिरधर का परिवार से संपर्क नहीं हो पाया। कई दिनों तक तलाश के बावजूद जब उनका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने मसूरी थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई।
इसी बीच मसूरी क्षेत्र की नाहल झाल नहर से एक सड़ा-गला अज्ञात शव बरामद हुआ। शव की कद-काठी गिरधर से मिलती-जुलती थी। हालांकि शव पर मौजूद कपड़े अलग थे, लेकिन परिजनों ने यह मान लिया कि जेल से निकलने के बाद गिरधर ने नए कपड़े खरीद लिए होंगे। इसी आधार पर शव की पहचान गिरधर के रूप में कर दी गई।
अंतिम संस्कार और तेरहवीं भी कर दी
शव की पहचान के बाद परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया और सभी धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ तेरहवीं भी संपन्न कर दी। परिवार को पहले से कुछ लोगों पर पुरानी रंजिश के चलते हत्या की आशंका थी। इसी वजह से पड़ोस में रहने वाले तीन भाइयों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया।
तेरहवीं के अगले दिन लौट आया गिरधर
घटना ने उस समय अप्रत्याशित मोड़ ले लिया, जब तेरहवीं के अगले ही दिन गिरधर अचानक अपने घर पहुंच गया। उसे जीवित देखकर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और गिरधर के बयान दर्ज किए।
गिरधर ने पुलिस को बताया कि जेल से छूटने के बाद वह पंजाब के एक आश्रम में चला गया था, जिसके कारण उसका परिवार से संपर्क नहीं हो सका।
अब बेगुनाह साबित हो सकते हैं नामजद पड़ोसी
गिरधर के जीवित मिलने के बाद हत्या के आरोप में नामजद किए गए तीनों पड़ोसी भाई भी करीब 12 दिन बाद अपने घर लौट आए हैं। उनका कहना है कि बिना किसी अपराध के उन्हें गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई के डर में रहना पड़ा।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की दोबारा जांच की जा रही है। शुरुआती तथ्यों के आधार पर हत्या के मुकदमे को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। साथ ही नहर से मिले अज्ञात शव की वास्तविक पहचान भी अब पुलिस के लिए एक नई जांच का विषय बन गई है।