उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम परधानी क्षेत्र के खासीश-कमसरे संपर्क मार्ग पर हाल ही में बनाई गई सड़क को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी करते हुए घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया, जिसकी वजह से सड़क कुछ ही दिनों में जवाब देने लगी।
ग्रामीणों के मुताबिक, जिस सड़क से लोगों को वर्षों तक बेहतर आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद थी, वह निर्माण के कुछ समय बाद ही टूटने लगी। सड़क की डामर परत इतनी कमजोर निकली कि लोग उसे हाथों से ही उखाड़ने लगे। इसका वीडियो भी स्थानीय लोगों ने बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि सड़क की ऊपरी परत मामूली दबाव पड़ते ही निकल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया गया होता, तो इतनी जल्दी सड़क की यह हालत नहीं होती। उनका आरोप है कि निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सड़क गांव के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग से छात्र स्कूल जाते हैं, किसान अपनी उपज बाजार तक पहुंचाते हैं और मरीज अस्पतालों तक जाते हैं। ऐसे में सड़क की खराब गुणवत्ता लोगों की परेशानी बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य में दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदारों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रकरण पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। अब लोगों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
यदि समय रहते इस मामले की गंभीरता से जांच नहीं की गई, तो यह केवल एक सड़क की बदहाली का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।