उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी तहसील क्षेत्र के ग्राम बारा में सार्वजनिक संपत्ति पर कथित कब्जे का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव के लोगों ने मंदिर के सामने स्थित पुराने सार्वजनिक कुएं की जमीन पर अवैध निर्माण कर कब्जा करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को सामूहिक शिकायती पत्र सौंपा है। शिकायत में कहा गया है कि गांव में स्थित रामजानकी मंदिर और शंकर जी मंदिर के सामने वर्षों पुराना सार्वजनिक कुआं हुआ करता था। यह कुआं कभी गांव के लोगों के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत था और आसपास के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसका उपयोग करते थे।
ग्रामीणों के मुताबिक समय बीतने के साथ कुआं जर्जर हो गया था। लगभग दो दशक पहले सुरक्षा कारणों से उसमें मिट्टी डलवाकर उसे बंद करा दिया गया। आरोप है कि बाद में इसी जमीन पर गांव के एक व्यक्ति ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया और धीरे-धीरे पूरी सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कर लिया।
इस मुद्दे को लेकर गांव में लंबे समय से विवाद बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा केवल निजी हितों के लिए नहीं, बल्कि गांव की साझा धरोहर और सरकारी जमीन के नुकसान का मामला भी है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो भविष्य में अन्य सार्वजनिक जमीनों पर भी अतिक्रमण बढ़ सकता है।
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक भूमि पर निर्माण कार्य बिना स्थानीय प्रशासन या ग्राम पंचायत की जानकारी के संभव नहीं हो सकता। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और संबंधित लोगों को संरक्षण मिलता रहा।
बताया जा रहा है कि इस मामले की शिकायत पहले भी कई बार उपजिलाधिकारी कालपी से की गई थी। शिकायत के बाद लेखपाल और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर पैमाइश भी की थी। ग्रामीणों का दावा है कि जांच के दौरान संबंधित पक्ष ने भी इस बात को स्वीकार किया था कि वहां पहले सार्वजनिक कुआं मौजूद था। इसके बावजूद अब तक कब्जा हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक कुएं की जमीन को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के सामने स्थित यह स्थान गांव की धार्मिक और सामाजिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी जमीन को बचाना जरूरी है।
फिलहाल यह मामला जालौन जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों की नाराजगी को देखते हुए प्रशासन पर जल्द कार्रवाई का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजर जिलाधिकारी स्तर पर होने वाली जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।