उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में आंधी-तूफान के दौरान हुई एक दर्दनाक घटना ने तीन परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। डकोर ब्लॉक के ग्राम सिमिरिया में अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते तीन मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि परिवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वर्षों की मेहनत से जुटाई गई गृहस्थी कुछ ही मिनटों में राख में तब्दील हो गई।
जानकारी के अनुसार घटना उस समय हुई जब क्षेत्र में तेज आंधी और तूफान चल रहा था। इसी दौरान किसी कारणवश आग लग गई और तेज हवाओं के कारण उसने विकराल रूप धारण कर लिया। आग ने देखते ही देखते गांव के निवासी रामस्वरूप, राजकुमार और मुन्नालाल के मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों ने आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन तेज हवाओं के चलते आग लगातार फैलती रही।
पीड़ित परिवारों के अनुसार आगजनी में घरों में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन, चारपाई, फर्नीचर, जरूरी दस्तावेज और दैनिक उपयोग का सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। इतना ही नहीं, घरों में रखी नकदी भी जलकर राख हो गई। परिवारों का कहना है कि उन्हें कुछ आधे जले हुए नोट मिले हैं, जिन्हें बदलवाने के लिए अब बैंक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है।
घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीण एक-दूसरे की मदद के लिए दौड़े और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि तब तक लाखों रुपये की संपत्ति जल चुकी थी। आग की लपटों और धुएं के कारण लोगों में दहशत फैल गई थी।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनकी पूरी गृहस्थी खत्म हो चुकी है और अब उनके सामने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती है। परिवारों ने जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता और राहत पैकेज देने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना सरकारी मदद के दोबारा घर बनाना और जीवन की आवश्यक वस्तुएं जुटाना बेहद कठिन होगा।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया तथा नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत राशि, खाद्यान्न और अस्थायी आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण हुए इस नुकसान की भरपाई केवल प्रशासनिक सहयोग से ही संभव है।
सिमिरिया गांव में हुई यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाएं किस तरह कुछ ही पलों में लोगों की मेहनत और सपनों को तबाह कर सकती हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि प्रभावित परिवारों को कितनी जल्दी राहत और सहायता मिलती है।