उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची को लेकर नया विवाद सामने आया है। कदौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत कुँआखेड़ा के दादूपुर गांव के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पहले से जारी पात्रता सूची में शामिल कई जरूरतमंद परिवारों के नाम हटाकर नई सूची तैयार की गई है, जिसमें कथित रूप से अपात्र लोगों को लाभार्थी बनाया गया है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, लेकिन दादूपुर गांव में योजना के चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि पहले तैयार की गई पात्रता सूची में शामिल कई परिवारों को नई सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि कुछ ऐसे लोगों के नाम जोड़ दिए गए जो योजना की पात्रता के मानकों पर खरे नहीं उतरते।
दादूपुर गांव की निवासी वंदना ने बताया कि उनके पति दिव्यांग हैं और पहले जारी पात्रता सूची में उनका नाम चौथे स्थान पर दर्ज था। उनका आरोप है कि बाद में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव द्वारा नई सूची तैयार की गई, जिसमें उनका नाम हटा दिया गया। इससे उनका परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हो गया। वंदना का कहना है कि उनका परिवार आज भी आवास की मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहा है और पात्र होने के बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाया।
ग्रामीणों का दावा है कि केवल वंदना ही नहीं, बल्कि गांव के कई अन्य जरूरतमंद परिवारों के नाम भी सूची से हटा दिए गए हैं। उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और पात्र लोगों की जगह अपात्र व्यक्तियों को शामिल किया गया। इस कारण गांव में असंतोष का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में पहले कदौरा के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की थी, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक कार्रवाई दिखाई नहीं दी। इसके बाद गांव के दर्जनों लोग जिला मुख्यालय उरई पहुंचे और जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि वास्तविक पात्र लाभार्थियों को दोबारा सूची में शामिल कर उन्हें योजना का लाभ दिलाया जाए।
फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और जरूरतमंद परिवारों को उनका अधिकार मिल सकेगा। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि इस विवाद का समाधान किस तरह किया जाता है।