उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जनसेवा केंद्र की आड़ में लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बैंक खाते खुलवाने और उनके माध्यम से साइबर ठगी को अंजाम देने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई के बाद यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि आखिर आम नागरिकों के पहचान संबंधी दस्तावेज कितने सुरक्षित हैं।
पुलिस के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र में संचालित जनसेवा केंद्रों की जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान साइबर सेल और थाना लिसाड़ी गेट पुलिस की संयुक्त टीम को कुछ संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। जांच के दौरान दो व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिनकी पहचान अरकम और निजामुद्दीन निवासी अंसार कॉलोनी, गोला कुआं, थाना कोतवाली, मेरठ के रूप में हुई।
पूछताछ और तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में ऐसे दस्तावेज और सामग्री मिली, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराधों में किया जा रहा था। बरामदगी में 92 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, 10 बैंक पासबुक, 5 चेकबुक, 139 वोटर आईडी कार्ड, 180 आधार कार्ड, 97 पैन कार्ड, 16 ब्लैंक हेल्थ कार्ड, दो मोबाइल फोन, फर्जी रबर स्टैंप और सील मोहर शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि आरोपी जनसेवा केंद्र की आड़ में गरीब और जरूरतमंद लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का झांसा देकर उनके दस्तावेज अपने पास रख लेते थे। इसके बाद उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी पहचान तैयार कर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों के जरिए संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन और साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।
पूछताछ में आरोपियों ने अपने एक फरार साथी अबू बकर का नाम भी बताया है। पुलिस का मानना है कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क है, जो लंबे समय से सक्रिय होकर डिजिटल फ्रॉड से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने कितने लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया और साइबर ठगी के कितने मामलों में इनकी संलिप्तता रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को अपने आधार, पैन, वोटर आईडी और बैंकिंग दस्तावेज किसी भी संस्था या व्यक्ति को बिना सत्यापन के नहीं सौंपने चाहिए। डिजिटल युग में पहचान संबंधी दस्तावेजों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलहाल मेरठ पुलिस फरार आरोपी अबू बकर की तलाश में दबिश दे रही है। साथ ही पूरे नेटवर्क की जांच कर उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।