उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के कूरेभार थाना क्षेत्र से सामने आई एक सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। 10 वर्षीय मासूम बच्ची को घर के पास से उठाकर ले जाने की कोशिश करने वाले आरोपी को पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में जहां एक ओर पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर एक पड़ोसी की बहादुरी और सतर्कता ने संभावित बड़ी अनहोनी को टाल दिया।
घटना 9 जून की बताई जा रही है। पीड़िता की मां ने कूरेभार थाने में तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई कि उनकी 10 वर्षीय पुत्री को बल्दीराय थाना क्षेत्र के चौबे का पुरवा देहली निवासी अशोक कुमार घर के पास से जबरन उठा ले गया। आरोप है कि आरोपी ने बच्ची का मुंह दबाया और उसे गलत नीयत से सुनसान स्थान की ओर ले जाने लगा।
हालांकि, इसी दौरान इलाके के एक पड़ोसी की नजर आरोपी और बच्ची पर पड़ गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उसने साहस का परिचय दिया और आरोपी का पीछा कर बच्ची को उसके चंगुल से छुड़ा लिया। अचानक लोगों के सक्रिय होने से घबराया आरोपी मौके से फरार हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कूरेभार थाना पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। क्षेत्राधिकारी बल्दीराय आशुतोष के निर्देशन में पुलिस टीम गठित की गई और आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी गई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपी अशोक कुमार को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे सर्विस लेन के पास से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। पता चला कि आरोपी का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है। वर्ष 2012 में वह नाबालिग से जुड़े एक गंभीर अपराध में दोषी ठहराया जा चुका था और सजा पूरी करने के बाद जमानत पर बाहर आया था। ऐसे में उसके दोबारा इस तरह की वारदात में शामिल होने से लोगों में आक्रोश बढ़ गया है।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि वारदात के पीछे उसकी मंशा क्या थी और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि समाज की जागरूकता और नागरिकों की सतर्कता कई बार अपराधों को होने से पहले रोक सकती है। यदि पड़ोसी समय रहते हस्तक्षेप न करता, तो यह मामला कहीं अधिक भयावह रूप ले सकता था। वहीं, पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने भी यह संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बच्चों की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। सतर्क नागरिक और संवेदनशील पुलिस मिलकर ही ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगा सकते हैं।