उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में पुलिस ने मोबाइल टावरों से महंगे कम्युनिकेशन उपकरण चोरी करने वाले एक अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह लंबे समय से कई जिलों में सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से मोबाइल टावरों को निशाना बनाकर लाखों रुपये के उपकरण चोरी कर रहा था। सुल्तानपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने अपराधियों के उस नेटवर्क को उजागर कर दिया है, जिसकी जड़ें दिल्ली तक फैली हुई थीं।
थाना अखंडनगर पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कुंडा भैरोपुर सर्विस लेन क्षेत्र में घेराबंदी कर गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सरफराज मलिक, अंकित कुमार, सुहेल मलिक, आमिर मलिक और मोहम्मद अयूब के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से चोरी के उपकरणों की बिक्री से प्राप्त करीब दो लाख रुपये नकद, दो अवैध तमंचे, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली दिल्ली नंबर की वैगनआर कार बरामद की गई है। जांच में सामने आया कि यह गिरोह मेरठ और गाजियाबाद क्षेत्र से संचालित होता था और बेहद शातिर तरीके से अपराध को अंजाम देता था।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी पहले लखनऊ में ठहरते थे और फिर वैगनआर कार की नंबर प्लेट बदलकर सुल्तानपुर, अमेठी, जौनपुर और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में मोबाइल टावरों की रेकी करते थे। जिन टावरों पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होती या सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होते, उन्हें देर रात निशाना बनाया जाता था।
गिरोह के सदस्य टावरों से कम्युनिकेशन डिवाइस, पैनल और अन्य महंगे उपकरण चोरी कर लेते थे। इसके बाद चोरी के सामान को कार्टन में पैक कर उन पर "फ्रैजाइल" और "लगेज" लिख दिया जाता था, ताकि किसी को संदेह न हो। फिर इन उपकरणों को दिल्ली भेजकर 20 से 40 हजार रुपये प्रति डिवाइस की कीमत पर बेच दिया जाता था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी हाईवे किनारे वाहन खड़ा कर आराम से सो जाते थे, जिससे उन पर किसी प्रकार का शक न हो। गिरोह के कई सदस्य पहले भी चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं और उनका आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है।
जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर सुल्तानपुर, अमेठी, जौनपुर और प्रतापगढ़ में दर्ज कई लंबित मामलों का भी खुलासा हुआ है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है और चोरी के नेटवर्क की पूरी श्रृंखला खंगाल रही है।
इस शानदार सफलता पर पुलिस अधीक्षक चारु निगम ने कार्रवाई में शामिल टीम का उत्साहवर्धन करते हुए 25 हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है। पुलिस का कहना है कि जिले में संगठित अपराध के खिलाफ अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।