संवाददाता , योगेश यादव
परिचय: पेट्रोल पंपों पर बढ़ती अराजकता पर चिंता
सुलतानपुर ज़िले में पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन ने गुरुवार को जिला प्रशासन के सामने अपनी सुरक्षा संबंधी मांगों को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि हेलमेट अनिवार्य नियम लागू होने के बाद से पंपों पर अराजकता, विवाद, और हिंसा जैसी घटनाएं तेज़ी से बढ़ी हैं।
संगठन का आरोप:
“ग्राहकों की तरफ से बढ़ रही गाली-गलौज, मारपीट और धमकी जैसी घटनाएं अब रोज़मर्रा का हिस्सा बन गई हैं। हमें एक सुरक्षित कार्यस्थल चाहिए।”
घटना का विवरण
गुरुवार को पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन के दर्जनभर से अधिक सदस्य सुलतानपुर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने एकत्र हुए। उन्होंने डीएम से मुलाकात कर उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने सुरक्षा बल की तैनाती और पुलिस की रूटीन पेट्रोलिंग की मांग की।
ज्ञापन में मुख्य बिंदु:
- हेलमेट न पहनने पर पेट्रोल न देने की स्थिति में विवाद बढ़े हैं
- शराब के नशे में धुत ग्राहक सेल्समैन से मारपीट करने लगते हैं
- कई ग्राहक राजनीतिक और दबंग छवि का लाभ लेकर पेट्रोल मांगते हैं
- कई मामलों में महिलाकर्मियों के साथ बदसलूकी की भी शिकायतें आईं हैं
- पुलिस या सुरक्षा गार्ड की गैर-मौजूदगी से स्थिति और बिगड़ रही है
डीएम को दी गई मांगें
News Time Nation Sultanpur को प्राप्त ज्ञापन के अनुसार, एसोसिएशन ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगे रखीं:
| क्रम | मांग | विवरण |
|---|---|---|
| 1️⃣ | पुलिस पेट्रोलिंग | सभी प्रमुख पंपों पर नियमित पुलिस गश्त |
| 2️⃣ | सुरक्षा गार्ड | निजी सुरक्षा गार्ड तैनात करने की अनुमति |
| 3️⃣ | CCTV निगरानी | हर पंप पर कैमरों की गुणवत्ता जांच और लाइव लिंक थाने से जोड़ना |
| 4️⃣ | हेल्पलाइन नंबर | पंप कर्मचारियों के लिए त्वरित सहायता नंबर |
| 5️⃣ | स्थानीय प्रशासन की बैठक | हर 15 दिन में डीलर और प्रशासन के बीच समीक्षा बैठक |
हेलमेट नियम से बढ़ी समस्याएं?
प्रदेश सरकार द्वारा “हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं” अभियान के लागू होने के बाद, पंप कर्मचारियों को बिना हेलमेट वाले ग्राहकों को मना करने के निर्देश दिए गए। यह नियम भले ही सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहतर हो, लेकिन ग्राउंड पर इसका पालन कराना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
पंप कर्मचारियों की आपबीती:
राहुल यादव, सेल्समैन:
“बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं देने पर एक ग्राहक ने बोतल फेंककर मार दी। हम डरे रहते हैं कि कब कौन क्या कर दे।”
सुषमा सिंह, महिला कर्मचारी:
“शराबी ग्राहक मारपीट करते हैं। महिला कर्मचारी सुरक्षित नहीं हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई मदद नहीं मिलती।”

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जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया
ज्ञापन मिलने के बाद News Time Nation Sultanpur ने जब जिलाधिकारी से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा:
जिलाधिकारी का बयान:
“सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। पेट्रोल पंप पर कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए हम स्थानीय थानों को निर्देश देंगे। जरूरत पड़ी तो सुरक्षा गार्ड भी तैनात होंगे।”
News Time Nation Sultanpur का विश्लेषण
सुलतानपुर जैसे उभरते हुए जिले में पेट्रोल पंप कर्मचारी अक्सर खतरे की रेखा पर काम करते हैं। ये सिर्फ तेल बेचने वाले नहीं, बल्कि हर दिन भीड़ प्रबंधन, नियम पालन और असामाजिक तत्वों से लड़ाई करते हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
2024–25 के अंदर सुलतानपुर ज़िले में पेट्रोल पंपों पर हुए विवादों के दर्ज आंकड़े:
| महीना | घटनाएं | प्राथमिकी दर्ज | गिरफ्तारी |
|---|---|---|---|
| जून | 14 | 5 | 2 |
| जुलाई | 19 | 7 | 3 |
| अगस्त | 22 | 10 | 5 |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि स्थिति गंभीर है और प्रशासनिक दखल ज़रूरी हो गया है।
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जनता की राय
विवेक पांडेय, स्थानीय निवासी:
“हेलमेट नियम अच्छा है, लेकिन कर्मचारियों पर ज़्यादा दबाव आ गया है। प्रशासन को जिम्मेदारी से सहयोग देना चाहिए।”
संगीता मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता:
“महिला कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल देना ज़रूरी है। महिलाओं पर अभद्रता अब अपराध की सीमा पार कर चुकी है।”
एसोसिएशन की चेतावनी
अगर प्रशासन द्वारा जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने जिले में सामूहिक कार्य बहिष्कार और सर्वजन अवगत आंदोलन की चेतावनी दी है।
अध्यक्ष, पेट्रोल पंप डीलर संघ:
“हम सड़क पर पेट्रोल बेचने नहीं आए, हमारी भी गरिमा है। यदि हमारी सुरक्षा की अनदेखी होती रही, तो हम पंप बंद कर देंगे।”
News Time Nation Sultanpur की भूमिका
News Time Nation Sultanpur इस मुद्दे पर:
- कर्मचारियों की आवाज़ को जनता तक पहुंचाता है
- प्रशासन से जवाबदेही मांगता है
- आम जनता को कानून, नियम और सुरक्षा के प्रति जागरूक करता है
- ऐसी घटनाओं को उजागर कर समाज में संतुलन बनाए रखने का कार्य करता है
निष्कर्ष: सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
पेट्रोल पंप कर्मचारी हमारे दैनिक जीवन के अनदेखे योद्धा हैं। उनका सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना न सिर्फ प्रशासन की, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।