मुख्य बिंदु:
- 8 लाख की सीसी सड़क सिर्फ 3 माह में ध्वस्त
- ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का आरोप लगाया
- B.D.O. ने जांच के बाद सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए
- News Time Nation Sultanpur की विशेष रिपोर्ट
घटिया निर्माण की पोल खुली
सुलतानपुर जिले के बल्दीराय ब्लॉक के ग्राम पंचायत दरियापुर में मनरेगा योजना के तहत बनी लगभग 8 लाख रुपये की लागत वाली सीसी सड़क महज तीन महीने में ही ध्वस्त हो गई।
यह सड़क इस्माइलपुर पक्की सड़क से वर्मा के चक तक बनाई गई थी, लेकिन अब इसकी हालत इतनी खराब है कि बीचों-बीच धंस गई है, और सीमेंट-गिट्टी उखड़ने लगी है।
ग्रामीणों का आरोप: भ्रष्टाचार और लापरवाही
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क महज कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह गई है।
राम लाल वर्मा (शिकायतकर्ता):
“इस सड़क का निर्माण पूरी तरह से घटिया सामग्री से किया गया है। रेत, गिट्टी और सीमेंट में भारी मिलावट थी।”
सीताराम यादव:
“प्लान के मुताबिक मोटाई और गहराई नहीं रखी गई। केवल पैसा खपाने के लिए जल्दीबाज़ी में काम कराया गया।”
शिकायतकर्ताओं की सूची:
- मिस्त्री राम लाल वर्मा
- सीताराम यादव
- मुरलीधर मिश्र
- राम सजीवन यादव
- आर.के. चौधरी
- करिया मिस्त्री
- कालीचरण विश्वकर्मा

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News Time Nation Sultanpur की पड़ताल
हमारी टीम जब मौके पर पहुँची तो सड़क की हालत बेहद खराब मिली। कई जगहों पर सड़क धंसी हुई थी, और उखड़ती हुई सीमेंट पर बच्चे खेलते देखे गए। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण कार्य सिर्फ 6–7 दिनों में ही पूरा कर दिया गया था, जबकि इतने बड़े प्रोजेक्ट में कम से कम 20 दिनों का समय लगना चाहिए था।
प्रशासन की जांच: अवर अभियंता की पुष्टि
शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए बल्दीराय के खंड विकास अधिकारी (BDO) राधेश्याम ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता जितेंद्र मोहन शर्मा को जांच के लिए भेजा।
जांच में पाया गया:
- सड़क वाकई धंसी हुई है
- सीमेंट और गिट्टी के गुणवत्ता में कमी
- निर्माण मानकों का उल्लंघन हुआ है
- सड़क की उम्र मात्र तीन महीने में समाप्त होना बड़ी लापरवाही का संकेत है
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B.D.O. की कार्यवाई
B.D.O. राधेश्याम ने रिपोर्ट के आधार पर संबंधित ठेकेदार और निगरानी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही है। उन्होंने सड़क को तत्काल दुरुस्त कराने का निर्देश भी दिया।
B.D.O. का बयान:
“सरकारी धन की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों की जवाबदेही तय की जाएगी।”
मनरेगा में भ्रष्टाचार: कोई नई बात नहीं?
यह घटना पहली बार नहीं है जब मनरेगा के अंतर्गत किए गए निर्माण कार्य पर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां:
| वर्ष | जिला | समस्या |
|---|---|---|
| 2023 | प्रयागराज | अधूरी सड़कें |
| 2024 | बस्ती | बगैर निर्माण के भुगतान |
| 2025 | सुलतानपुर | घटिया निर्माण, सड़क ध्वस्त |
मनरेगा: उद्देश्य और वास्तविकता
मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का उद्देश्य ग्रामीणों को रोज़गार देना और बुनियादी ढांचे का विकास करना है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कई योजनाएं केवल पेपरवर्क में सिमट जाती हैं।
News Time Nation Sultanpur बार-बार ऐसे भ्रष्टाचार को उजागर करता आया है और इस बार भी हम गाँव की आवाज़ शासन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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ग्रामीणों की मांग
- दोषियों पर एफआईआर हो
- निर्माण में लगे अधिकारियों और ठेकेदारों की जांच हो
- सीसी रोड को दोबारा मानक के अनुरूप बनाया जाए
- भविष्य में ऐसी लापरवाही पर रोक लगे
विश्लेषण: किसकी है जिम्मेदारी?
इस प्रकार की लापरवाही के लिए सिर्फ एक पक्ष नहीं, बल्कि संपूर्ण सिस्टम जिम्मेदार होता है:
| पक्ष | जिम्मेदारी |
|---|---|
| ठेकेदार | घटिया सामग्री का प्रयोग |
| अभियंता | मानकों की निगरानी में लापरवाही |
| ग्राम प्रधान | निर्माण की गुणवत्ता की अनदेखी |
| प्रशासन | कार्यों की समय पर ऑडिट न करना |
News Time Nation Sultanpur की सिफारिश
- पारदर्शिता लाने के लिए “Live Monitoring App” हो
- प्रत्येक प्रोजेक्ट का ऑडिट अनिवार्य हो
- ग्रामीणों की निगरानी समिति बनाई जाए
- लोकल मीडिया को नियमित अपडेट दिए जाएं
निष्कर्ष
मनरेगा जैसी योजनाओं का सही लाभ तभी संभव है जब काम पारदर्शिता और जवाबदेही से हो। सड़कें जनता की मूलभूत ज़रूरत हैं। इस मामले में सख्त कदम उठाना ही एकमात्र समाधान है, वरना सरकारी योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएंगी।