केरल में एक BJP नेता को मुस्लिम नाबालिग लड़की से यौन शोषण के POCSO केस में कोर्ट ने लाइफ़-टिल-डेथ की सज़ा सुनाई। फैसले से राजनीति में हलचल।केरल में राजनीति उस वक्त हिल गई जब अदालत ने एक बीजेपी नेता को POCSO एक्ट के तहत दोषी पाते हुए ‘लाइफ़-टिल-डेथ’ यानी जीवन के अंतिम दिनों तक जेल में रखने की सज़ा सुनाई। आरोपी नेता पर एक मुस्लिम नाबालिग लड़की के यौन शोषण का गंभीर आरोप था। लंबे समय तक चली सुनवाई, पुख़्ता सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने यह सख्त फैसला सुनाया। इस ऐतिहासिक फैसले ने पूरे राज्य में राजनीतिक बहस और हड़कंप मचा दिया है।

केरल में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है, जहां एक स्थानीय बीजेपी नेता को POCSO (Protection of Children from Sexual Offences Act) केस में दोषी ठहराते हुए अदालत ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। यह सिर्फ साधारण लाइफ़ इम्प्रिज़नमेंट नहीं बल्कि ‘लाइफ़-टिल-डेथ’ यानी आरोपी को अपनी जीवन की अंतिम सांस तक जेल में ही रहना होगा।इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया है, जबकि पीड़ित पक्ष ने अदालत के निर्णय को न्याय की जीत बताया है।

क्या है पूरा मामला?
मामला केरल के एक जिले का है, जहां भाजपा से जुड़े एक स्थानीय नेता पर एक मुस्लिम नाबालिग लड़की के यौन शोषण का आरोप लगा था। आरोपी नेता पीड़िता के परिवार को जानता था और इसी विश्वास का गलत फायदा उठाते हुए उसने यह घिनौना अपराध किया। पीड़िता ने साहस दिखाते हुए अपने परिवार के साथ शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामला POCSO एक्ट के तहत दर्ज कर लिया।जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सबूत सामने आए—
- पीड़िता के बयान
- मेडिकल रिपोर्ट
- डिजिटल साक्ष्य
- घटनास्थल का प्रमाण
- गवाहों के बयान
इन सभी ने आरोपी के अपराध को और मजबूत तरीके से अदालत के सामने रखा।सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि – “आरोप साबित हो चुके हैं। आरोपी ने एक मासूम बच्ची का विश्वास तोड़ा और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से आहत किया। ऐसे अपराधों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। अदालत आरोपी को ‘लाइफ़-टिल-डेथ’ की सज़ा सुनाती है।” यह सज़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत ने माना कि अपराध की गंभीरता इतनी अधिक है कि सामान्य उम्रकैद (14 वर्ष) पर्याप्त नहीं है।इस फैसले के बाद केरल की राजनीति गरमा गई है।
विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने सीधे तौर पर बीजेपी नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि—
- “बीजेपी नेताओं में अपराध बढ़ रहे हैं”
- “नैतिकता की बातें करने वाली पार्टी अपने ही नेताओं के अपराध पर चुप क्यों है?”
- “यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण का परिणाम है।”
बीजेपी ने इस फैसले के बाद कहा कि पार्टी किसी भी अपराधी को संरक्षण नहीं देती।पार्टी प्रवक्ताओं ने बयान जारी करते हुए कहा – “कानून अपना काम कर रहा है। पार्टी का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। दोषी को कड़ी सज़ा मिली है, हम न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं।”

पीड़िता के परिवार ने अदालत के फैसले पर राहत व्यक्त की है।परिवार ने कहा— “हमें भरोसा था कि एक दिन न्याय मिलेगा। हमारी बच्ची ने बहुत कुछ झेला। हमें उम्मीद है कि अब वह सामान्य जीवन जी सकेगी।”
सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
केरल और देश भर के महिला एवं बाल अधिकार संगठनों ने अदालत के इस फैसले की सराहना की है।
कई संगठनों ने कहा कि—
- यह फैसला भविष्य में कठोर संदेश देगा
- नाबालिगों के खिलाफ अपराध पर सख्त कार्रवाई जरूरी
- ऐसी घटनाओं में राजनीतिक पहचान या रसूख अपराध की गंभीरता को कम नहीं कर सकते
POCSO कानून क्या कहता है?
POCSO एक्ट बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से सुरक्षा के लिए बनाया गया कानून है। इसमें—
- कठोर सज़ा
- फास्ट ट्रैक सुनवाई
- पीड़िता की पहचान सुरक्षित
- पुलिस जांच में विशेष प्रावधान
जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
इस केस में अदालत ने सेक्शन 5 और 6 के तहत अधिकतम सज़ा सुनाई है।
मामले का राजनीतिक असर क्या होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि—
- आने वाले लोकल इलेक्शन पर इसका असर पड़ सकता है
- विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाएगा
- बीजेपी इससे डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश करेगी
केरल में पहले ही बीजेपी का जनाधार सीमित है, ऐसे में यह मामला पार्टी की छवि पर असर डाल सकता है।