बस्ती में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही: बेसमेंट में चल रहा ‘प्रकाश नर्सिंग होम’,मरीजों की जान पर मंडराता खतरा

बस्ती संवाददाता :- धर्मेद्र द्विवेदी

दिल्ली में बेसमेंट हादसे के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सबक लेता नहीं दिख रहा है। बस्ती जिले के उजियानपुर में वर्षों से नियम विरुद्ध तरीके से चल रहा ‘प्रकाश नर्सिंग होम’ मरीजों की जान जोखिम में डाल रहा है। बेसमेंट में अस्पताल संचालन से लेकर अनाधिकृत लोगों द्वारा इलाज तक, हर स्तर पर गंभीर लापरवाही सामने आई है।

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दिल्ली में हाल ही में कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि बेसमेंट जैसी जगहों पर बिना सुरक्षा मानकों के किसी भी गतिविधि का संचालन कितना खतरनाक हो सकता है। लेकिन इससे इतर, उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा अब भी अपनी पुरानी लापरवाही से बाहर नहीं आ पाया है। बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी न तो जागरूक दिखते हैं और न ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों को गंभीरता से ले रहे हैं।

इसी लापरवाही का ताज़ा और चौंकाने वाला उदाहरण लालगंज थाना क्षेत्र के उजियानपुर में स्थित ‘प्रकाश नर्सिंग होम’ के रूप में सामने आया है। यह अस्पताल वर्षों से पूरी तरह असुरक्षित बेसमेंट में संचालित हो रहा है, जहां मरीजों की जिंदगी हर पल जोखिम में रहती है। लंबे समय से सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों की खुली धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। अस्पताल का संचालन खतरनाक बेसमेंट में किया जा रहा है, जहाँ न तो आपातकालीन निकास है, न फायर सेफ्टी के इंतजाम। प्रसव के बाद महिलाओं और नवजातों को भी इसी असुरक्षित बेसमेंट में भर्ती किया जाता है। अस्पताल की रजिस्ट्रेशन में जिन डॉक्टरों का नाम दर्ज है, वे मौजूद ही नहीं रहते, और उनकी जगह अप्रशिक्षित लोग इलाज कर रहे हैं। कई शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं CMO राजीव निगम ने जांच टीम गठित कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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🔴 बेसमेंट में संचालित हो रहा अस्पताल—सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियाँ

नियमानुसार, बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोरेज के लिए किया जा सकता है। लेकिन प्रकाश नर्सिंग होम में न सिर्फ ओपीडी चलाई जा रही है, बल्कि प्रसूति कक्ष, वार्ड, मेडिकल स्टोर, दवाओं का भंडारण और यहां तक कि नवजातों की देखभाल भी उसी बेसमेंट में की जा रही है। सबसे खतरनाक बात यह है कि बेसमेंट में

  • केवल एक ही प्रवेश और निकास का रास्ता है,
  • कोई आपातकालीन एग्जिट मौजूद नहीं,
  • फायर सेफ्टी उपकरण या सिस्टम का कोई इंतजाम नहीं,
  • बिजली का जाल बेहद अव्यवस्थित और शॉर्ट सर्किट की संभावना हर समय बनी रहती है।

ऐसी स्थिति में अगर आगजनी, पानी भरने, गैस लीक या कोई अन्य आपदा हो जाए, तो वहां मौजूद दर्जनों मरीजों को बचाना लगभग असंभव होगा। यह हालात किसी संभावित त्रासदी को खुला निमंत्रण देते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल के बेसमेंट में डिलीवरी के बाद महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेड लगाकर भर्ती किया जाता है
प्रसूता महिलाओं और नवजातों को ऐसे असुरक्षित माहौल में रखना किसी भी मानक के पूरी तरह खिलाफ है।जहां हवा का उचित प्रवाह नहीं, प्राकृतिक रोशनी नहीं, और किसी भी आपदा से निपटने का कोई इंतजाम नहीं—वहां इलाज करना न सिर्फ गैरकानूनी, बल्कि अमानवीय है।

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🔴 लाइसेंसधारी डॉक्टर गायब, इलाज कर रहे अप्रशिक्षित लोग

अस्पताल के रजिस्ट्रेशन में जिन डॉक्टरों की डिग्रियां और नाम लगाए गए हैं, वे अस्पताल में मौजूद ही नहीं रहते
उनकी गैरमौजूदगी में अप्रशिक्षित, अनधिकृत और अनुभवहीन लोग मरीजों का उपचार कर रहे हैं।यह स्थिति सीधे-सीधे मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। न सिर्फ यह मेडिकल एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि किसी भी समय मरीज की जान जाने का खतरा बना रहता है।स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने इस अस्पताल के खिलाफ कई बार उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायतें दीं। लेकिन हैरत यह है कि आज तक कोई ठोस कार्यवाई नहीं की गई।

  • क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जानबूझकर इस मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं?
  • क्या नियमों की अनदेखी के बदले कोई सौदेबाज़ी चल रही है?
  • एक संभावित हादसे के इंतज़ार में अधिकारी क्यों बैठे हैं?
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इस पूरे मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) राजीव निगम ने कहा – “अस्पताल की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। यदि अस्पताल का संचालन बेसमेंट में हो रहा है तो यह पूरी तरह गलत है। जांच में कमी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।”हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक ऐसी कई जांचें की गईं, लेकिन कार्यवाई कभी नहीं हुई। इसलिए इस बार की जांच पर भी लोगों को संदेह है।

🔴 संभावित बड़ा हादसा—किसका इंतज़ार?

बेसमेंट में अस्पताल चलाना खुद में एक बड़ा खतरा है। दिल्ली की घटना ने साबित किया है कि एक छोटी सी चूक भी दर्जनों जिंदगियों को निगल सकती है। बस्ती में प्रकाश नर्सिंग होम की स्थिति बिल्कुल वैसी ही है—

  • भीड़भाड़ वाला बेसमेंट
  • कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं
  • न प्रशिक्षित डॉक्टर, न स्टाफ
  • नियमों और मानकों का जमीनी स्तर पर उल्लंघन

यदि समय रहते कार्यवाई नहीं हुई, तो बस्ती में कभी भी एक बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग पर होगी।

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प्रकाश नर्सिंग होम का मामला न सिर्फ एक अस्पताल की लापरवाही है, बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग में फैली अव्यवस्था, अनदेखी और मिलीभगत का आईना भी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच टीम क्या रिपोर्ट देती है और क्या विभाग वास्तव में कोई कड़ा कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दब कर रह जाएगा।

Khursheed Khan Raju

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