लखनऊ से उत्तर प्रदेशवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब नागरिक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से ही अपने खेत, घर, गांव और मोहल्ले की सटीक तस्वीरें देख सकेंगे। राजस्व परिषद ने एक विशेष मोबाइल एप तैयार किया है, जिसका परीक्षण अंतिम चरण में है। इसे अगले माह लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है और इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समय भी मांगा गया है।
उत्तर प्रदेश में भूमि से जुड़े विवाद लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में खसरा-खतौनी की जानकारी, खेतों की वास्तविक सीमाएं और घरों के सही नक्शे को लेकर अक्सर भ्रम बना रहता है। इस समस्या को कम करने और नागरिकों को सरल, आधुनिक और डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्व परिषद ने एक अत्याधुनिक मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया है। यह एप नागरिकों को अपने खेत और घर की सैटेलाइट तस्वीरें मोबाइल से ही देखने की सुविधा प्रदान करेगा।

मोबाइल एप का परीक्षण अंतिम चरण में
राजस्व परिषद के सूत्रों के अनुसार, एप का विकास लगभग पूरा हो चुका है और वर्तमान में इसका तकनीकी परीक्षण जारी है। उम्मीद की जा रही है कि अगले माह तक इसे आम जनता के लिए लॉन्च कर दिया जाएगा। परिषद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसे लॉन्च करने के लिए समय भी मांगा है, जिससे राज्य स्तर पर इसका औपचारिक शुभारंभ किया जा सके।
नागरिकों की सुविधा पर खास फोकस
राजस्व परिषद का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में भीड़ कम करना और नागरिकों को अधिक से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराना है। फिलहाल आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी, भूमि संबंधित पत्रों और विभिन्न तरह के प्रमाण पत्रों के लिए लोगों को तहसील और लेखपाल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नई व्यवस्था के तहत परिषद धीरे-धीरे इन सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर रहा है।
परिषद के अनुसार, लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों के लिए भी एक विशेष डैशबोर्ड उपलब्ध कराया गया है, जिससे वे नागरिकों के ऑनलाइन आवेदनों को निर्धारित समयसीमा के भीतर निपटा सकें। साथ ही, संबंधित कर्मियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय कर दी गई हैं ताकि किसी भी प्रकार की देरी या गड़बड़ी को रोका जा सके।

सैटेलाइट तकनीक से तैयार होंगे सटीक नक्शे
एप की सबसे खास बात यह है कि इसके माध्यम से उपलब्ध नक्शे सैटेलाइट तकनीक की मदद से तैयार किए जा रहे हैं। ये नक्शे नागरिकों को उनके खेत, घर, गांव और पूरे मोहल्ले की वास्तविक तस्वीर के साथ प्रस्तुत करेंगे। उपयोगकर्ता को केवल अपने खेत या घर का गाटा नंबर, खतौनी, या खसरा नंबर दर्ज करना होगा, जिसके बाद एप उनके संबंधित भूखंड की सटीक लोकेशन और तस्वीर स्क्रीन पर प्रदर्शित करेगा।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य के सभी 57,694 ग्राम पंचायतों और एक लाख से अधिक राजस्व ग्रामों के नक्शों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है। इसका अधिकांश भाग पूरा होने के बाद एप जनता के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

भू-विवादों को कम करने में मददगार
राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार ने बताया कि एप न केवल उपयोगकर्ता को उनके खेत-घर की पहचान करने में मदद करेगा, बल्कि यह भूमि विवादों को काफी हद तक समाप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अक्सर देखने में आता है कि सीमांकन, पैमाइश या भ्रम के कारण छोटे-मोटे विवाद बड़े रूप ले लेते हैं। डिजिटल नक्शों के आने के बाद पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद की गुंजाइश कम होगी।
एप पर प्रत्येक खेत और घर का रकबा (एरिया) भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होगा, जो राजस्व दस्तावेज़ों से मेल खाएगा। इससे नागरिकों को अपने भूमि अभिलेखों की जांच करने में भी सुविधा मिलेगी।

डिजिटल यूपी की दिशा में बड़ा कदम
उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही डिजिटल शासन पर जोर देती आई है। विभिन्न विभागों में ऑनलाइन सेवाएं देने के बाद अब भूमि प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में यह एप एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ नागरिकों का समय बचेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी की संभावनाएं भी काफी कम होंगी।

एप के लॉन्च के बाद नागरिक इसे गूगल प्ले स्टोर और सरकारी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। शुरुआती चरण में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए इसे एक समान रूप से उपलब्ध कराने की योजना है। भविष्य में एप में भूमि संबंधित अन्य सुविधाएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
राजस्व परिषद का दावा है कि यह एप उत्तर प्रदेश में डिजिटल भूमि प्रबंधन को एक नई दिशा देने वाला होगा और राज्य में वर्षों से चल रहे भूमि विवादों को हल करने में एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।