आधुनिक जीवनशैली के बीच अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड (UPF) तेजी से हमारे भोजन का हिस्सा बनता जा रहा है और इसके कारण मोटापा, डायबिटीज, हार्ट, लिवर तथा किडनी संबंधी रोगों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। The Lancet में प्रकाशित नवीन अध्ययन श्रृंखला ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल जागरूकता नहीं बढ़ी, तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है।
आधुनिक जीवनशैली की तेज रफ्तार ने हमारे भोजन के स्वरूप को ही बदल दिया है। जल्दी तैयार होने वाले, स्वादिष्ट और आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थों ने हमारे आहार में अपनी जगह तो बना ली, लेकिन धीरे-धीरे वही हमारी सेहत के लिए सबसे बड़े खतरे का कारण बनते जा रहे हैं। विशेष रूप से अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड (Ultra-Processed Food) — जैसे चिप्स, बिस्किट, पैकेज्ड ड्रिंक्स, इंस्टैंट नूडल्स, आइसक्रीम, पेस्ट्री, सॉस और रेडी-टू-ईट स्नैक्स — अब आधुनिक बीमारियों की जड़ बनते दिखाई दे रहे हैं।

लांसेट अध्ययन की बड़ी चेतावनी
The Lancet ने हाल ही में इस विषय पर कई शोधों का विश्लेषण करते हुए एक श्रृंखला प्रकाशित की है। इसमें 43 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने 104 अध्ययनों का मूल्यांकन किया और निष्कर्ष निकाला कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड भोजन 12 प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। इन बीमारियों में शामिल हैं:
- टाइप-2 डायबिटीज
- कार्डियोवैस्कुलर डिजीज
- किडनी रोग
- डिप्रेशन
- उच्च रक्तचाप
- मोटापा
- असामयिक मृत्यु
विशेषज्ञों के अनुसार, UPF में ऐसे कम-से-कम पाँच घटक शामिल होते हैं जो सामान्य रसोई में प्रयुक्त नहीं होते — जैसे प्रिजर्वेटिव्स, आर्टिफिशियल कलर, एडिटिव्स, स्वीटनर और इमल्सीफायर। ये तत्व भोजन को स्वादिष्ट तो बनाते हैं पर लंबे समय में शरीर के मेटाबॉलिज़्म को नुकसान पहुंचाते हैं।

भारत में मोटापा और डायबिटीज बढ़ने का बड़ा कारण
भारत में पिछले एक दशक में मोटापा और डायबिटीज के मरीजों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। ICMR–India Diabetes Report 2023 के अनुसार:
- 28.6% भारतीय मोटापे से जूझ रहे हैं
- 11.4% में डायबिटीज
- 15.3% में प्री-डायबिटीज
- 40% भारतीयों में एब्डॉमिनल ओबेसिटी है, यानी पेट के आसपास वसा का ज्यादा जमाव
बच्चों में मोटापे की स्थिति भी चिंताजनक है। NFHS-5 में 3.4% बच्चे मोटापे से प्रभावित पाए गए, जबकि NFHS-4 में यह आंकड़ा 2.1% था। इससे स्पष्ट है कि समस्या तेजी से बढ़ रही है।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड कैसे करता है नुकसान?
UPF में अधिक मात्रा में शुगर, रिफाइंड कार्ब, ट्रांस फैट और सोडियम होता है। स्वाद बढ़ाने के लिए जो एडिटिव्स मिलाए जाते हैं, वे इसे अत्यधिक “एडिक्टिव” बनाते हैं। लोग इन्हें बार-बार खाते हैं और कैलोरी की मात्रा जरूरत से कहीं ज्यादा बढ़ जाती है।

1. ब्लड शुगर तेजी से बढ़ना
रिफाइंड कार्ब और शुगर की अधिकता ब्लड ग्लूकोज लेवल को अचानक बढ़ाती है, जिससे इंसुलिन रिस्पांस बिगड़ता है। यह टाइप-2 डायबिटीज की ओर पहला कदम है।
2. मेटाबोलिज्म पर नकारात्मक प्रभाव
UPF शरीर के प्राकृतिक मेटाबोलिक प्रक्रियाओं को बाधित करता है। इससे वजन तेजी से बढ़ता है और फैट बर्निंग क्षमता घट जाती है।
3. पेट के आसपास वसा जमा होना
इस भोजन की उच्च कैलोरी और कम फाइबर प्रकृति के कारण एब्डॉमिनल ओबेसिटी बढ़ती है, जो हार्ट और किडनी रोगों का जोखिम बढ़ाती है।
4. आवश्यक पोषक तत्वों की कमी
UPF में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की कमी होती है। इससे शरीर में पोषण असंतुलन पैदा होता है।
ग्रामीण भारत तक पहुँच चुका है UPF का खतरा
पहले अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड केवल शहरी जीवनशैली का हिस्सा माना जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में पैकेज्ड फूड उद्योग की तेज़ वृद्धि के कारण यह छोटे शहरों और गांवों में भी तेजी से फैल चुका है। यही कारण है कि पूरे देश में मोटापा, पेट की चर्बी, ब्लड शुगर और उच्च रक्तचाप के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

क्या है समाधान?
विशेषज्ञों के अनुसार—
- व्यक्तिगत स्तर पर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है
- नीतिगत स्तर पर प्रतिबंध और लेबलिंग को सख्त किया जाए
- स्कूलों और कॉलेजों में UPF पर नियंत्रण लगाया जाए
- पारंपरिक, ताज़ा और घर में बने भोजन को बढ़ावा दिया जाए
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड आधुनिक लाइफस्टाइल की सुविधा का प्रतीक बन गया है, पर इसके दुष्प्रभाव गंभीर हैं। यदि भारत को बढ़ते मोटापे और डायबिटीज के संकट से बचाना है, तो लोगों को अपने आहार में सुधार लाना होगा और सरकार को इसके नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।