तमिलनाडु के इरोड में दर्दनाक हादसा: केला खाते समय दम घुटने से 5 साल के मासूम की मौत

तमिलनाडु के इरोड जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक पांच वर्षीय मासूम की मौत सिर्फ इसलिए हो गई क्योंकि केला खाते समय उसका दम घुट गया। माता-पिता के सामने हुई इस घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। यह घटना न केवल दुखद है, बल्कि छोटे बच्चों के भोजन सुरक्षा और सतर्कता के महत्व पर भी बड़ा सवाल उठाती है।

तमिलनाडु के इरोड जिले में हुआ यह हादसा हर उस परिवार के लिए चेतावनी है जहाँ छोटे बच्चे रहते हैं। पाँच साल का एक बच्चा सुबह नाश्ता करते हुए केला खा रहा था। अचानक उसका एक बड़ा टुकड़ा गले में फँस गया और उसका दम घुटने लगा। घर में मौजूद परिजनों ने तुरंत स्थिति को गंभीरता से समझा और उसे नज़दीकी अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने मासूम को मृत घोषित कर दिया।

तमिलनाडु

कैसे हुआ हादसा?

परिवार के अनुसार, बच्चा खेलते-खेलते केला खा रहा था। इसी दौरान उसने जल्दी-जल्दी बड़े कौर निगलने की कोशिश की। एक बड़ा केला का टुकड़ा उसके गले में अटक गया और सांस की नली अवरुद्ध हो गई। बच्चों में अक्सर देखा जाता है कि वे खाना चबाने की बजाय निगलने की कोशिश करते हैं, जिससे घुटन (Choking) का खतरा बढ़ जाता है।

माता-पिता पर गहरा सदमा

इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। माता-पिता इस हादसे को समझ ही नहीं पा रहे कि एक साधारण-सी चीज़—केला—कैसे उनके बच्चे की जान ले सकती है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि बच्चा बिल्कुल स्वस्थ था और कुछ ही पलों में सबकुछ बदल गया। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है, और लोग इसे बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण मान रहे हैं।

क्या होता है चोकिंग?

चोकिंग तब होती है जब भोजन या कोई ठोस चीज़ बच्चे की सांस की नली को ब्लॉक कर देती है। छोटे बच्चों में यह खतरा ज्यादा होता है क्योंकि:

  • वे भोजन को ठीक से चबाते नहीं
  • चलते-फिरते या खेलते-खेलते खाते हैं
  • बड़े आकार के भोजन के टुकड़े निगलने की कोशिश करते हैं
  • घबराने पर सांस तेज़ हो जाती है जिससे वस्तु और गहराई तक फंस सकती है
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ऐसी दुर्घटनाओं से कैसे बचें?

यह घटना हमें बच्चों के भोजन के दौरान कुछ ज़रूरी सावधानियां अपनाने का संदेश देती है:

  1. बच्चों को हमेशा बैठकर खाना सिखाएं।
  2. फलों के छोटे-छोटे टुकड़े करके दें।
  3. खाने के समय खेलना, दौड़ना या बात करना रोकें।
  4. केला, अंगूर, मूंगफली, पॉपकॉर्न जैसे खाद्य पदार्थ छोटे बच्चों को सावधानी से दें।
  5. बच्चों को निगलने से पहले अच्छी तरह चबाना सिखाएं।
  6. माता-पिता और घर के बुजुर्गों को बेसिक फर्स्ट-एड व चोकिंग रिलीफ तकनीकें सीखनी चाहिए।

समाज के लिए सीख

इरोड की यह दर्दनाक घटना हमें याद दिलाती है कि बच्चों के भोजन से जुड़ी लापरवाही कितनी खतरनाक हो सकती है। छोटे बच्चों के लिए भोजन सुरक्षा केवल सावधानी नहीं, बल्कि जीवनरक्षक कदम है।ऐसे हादसों से सीख लेते हुए माता-पिता, स्कूल और समाज को बच्चों के भोजन के दौरान अधिक सतर्क रहना चाहिए। छोटे-छोटे उपाय भी बच्चों को ऐसी जानलेवा स्थिति से बचा सकते हैं।

Khursheed Khan Raju

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