रिपोर्ट :- खुशबू मिश्रा
साल 1939 में पेरू की एक बच्ची, लीना मेदीना, ने महज 5 साल की उम्र में एक बेटे को जन्म दिया और दुनिया की सबसे कम उम्र की मां बनने का रिकॉर्ड बनाया। यह घटना आज भी मेडिकल साइंस के इतिहास की सबसे बड़ी पहेलियों में से एक है। डॉक्टरों के अनुसार लीना “प्रिकॉशियस प्यूबर्टी” नामक एक अत्यंत दुर्लभ स्थिति से पीड़ित थीं, जिसके कारण बचपन में ही उनके शरीर में असामान्य शारीरिक परिवर्तन होने लगे। यह मामला वर्षों बाद भी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक रहस्य बना हुआ है।

दुनिया में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने मेडिकल साइंस और मानव शरीर की संभावनाओं को लेकर विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। इनमें से सबसे प्रसिद्ध और रहस्यमयी मामला है लीना मेदीना का, जिसने मानव इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ा जिसे समझना आज भी डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के लिए आसान नहीं है। पेरू की रहने वाली लीना मेदीना ने 1939 में मात्र 5 साल, 7 महीने और 21 दिन की उम्र में एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। यह घटना दुनिया की सबसे कम उम्र में मातृत्व का रिकॉर्ड है और आज भी एक स्थापित मेडिकल फैक्ट के रूप में मान्य है।

यह मामला तब सामने आया जब लीना के पेट का आकार असामान्य रूप से बढ़ने लगा। पहले परिवार को लगा कि यह किसी ट्यूमर या बीमारी का असर है। लेकिन जब डॉक्टरों ने जांच की, तो वे हैरान रह गए—लीना गर्भवती थीं। यह स्थिति खुद डॉक्टरों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। विस्तृत जांच, एक्स-रे और चिकित्सा रिपोर्टों ने पुष्टि की कि लीना वास्तव में गर्भवती थीं, और यह कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं थी।
डॉक्टरों के अनुसार, लीना “प्रिकॉशियस प्यूबर्टी” नामक एक अत्यंत दुर्लभ मेडिकल स्थिति से पीड़ित थीं। इस स्थिति में बच्चों के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन बहुत कम उम्र में शुरू हो जाते हैं। लड़कियों में यह सामान्यतः 8 साल से पहले और लड़कों में 9 साल से पहले दिखाई देने लगता है। इस कारण प्रजनन क्षमता भी शुरुआती उम्र में विकसित हो सकती है। माना जाता है कि हर 10,000 बच्चों में से लगभग 1 बच्चा इस स्थिति से प्रभावित हो सकता है, और लीना उन्हीं दुर्लभ मामलों में से एक थीं।

लीना की उम्र और शरीर सामान्य प्रसव के लिए तैयार नहीं था। इसलिए डॉक्टरों ने सुरक्षित सी-सेक्शन के माध्यम से बच्चे को जन्म दिलाया। बच्चे की सेहत सामान्य थी और यह घटना वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई। हालांकि, लीना के गर्भवती होने की परिस्थितियों को लेकर कई प्रश्न उठे, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड, मेडिकल टीम की रिपोर्ट और एक्स-रे ने इस घटना को सत्यापित किया। बच्चे के पिता की पहचान आज तक सामने नहीं आई, और परिवार ने भी इस विषय पर कभी सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी साझा नहीं की।

यह मामला सिर्फ वैज्ञानिक Curiosity का विषय नहीं था, बल्कि एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सवाल भी खड़ा करता है। इतनी कम उम्र में इस तरह के मामले अत्यंत संवेदनशील होते हैं, इसलिए लीना और उनके परिवार को निजी जीवन की सुरक्षा दी गई। लीना ने अपनी आगे की जिंदगी पूरी तरह सामान्य तरीके से बिताई। उन्होंने किसी भी प्रकार की प्रसिद्धि या मीडिया एक्सपोज़र से दूरी बनाए रखी और अपने बेटे का पालन-पोषण प्रेम से किया। उन्होंने बड़ी-बड़ी डील्स, डॉक्यूमेंट्री ऑफर्स और इंटरव्यू तक ठुकरा दिए।

आज, 85+ साल बाद भी लीना मेदीना का मामला दुनिया के लिए एक मेडिकल मिस्ट्री है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हालांकि प्रिकॉशियस प्यूबर्टी की वजह से यह जैविक रूप से संभव था, लेकिन इतनी कम उम्र में गर्भावस्था किसी भी रूप में सामान्य नहीं मानी जा सकती। यह घटना बताती है कि मानव शरीर कितनी जटिल और अप्रत्याशित स्थितियों का सामना कर सकता है।
यह कहानी आज भी विज्ञान, इतिहास और चिकित्सा जगत में सबसे ज्यादा शोध किए जाने वाले मामलों में से एक है और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक रहस्य बनी रहेगी।