पंक्चर की दुकान से अदालत तक: प्रयागराज के अहद अहमद ने बिना कोचिंग पहले प्रयास में रचा इतिहास

रिपोर्ट :- खुशबू मिश्रा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के एक छोटे से गाँव से आने वाले अहद अहमद ने अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और लगन के दम पर वह कर दिखाया जो लाखों युवा सपने में देखते हैं। पिता के साथ पंक्चर की दुकान पर काम करते हुए उन्होंने बिना किसी कोचिंग और पहले प्रयास में जज बनकर इतिहास रच दिया। उनकी सफलता हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा बनी है जो कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखने का साहस रखता है।

सपने देखने का हक़ सभी को होता है, लेकिन उन्हें पूरा करने का साहस कम ही लोग दिखा पाते हैं। अहद अहमद उन दुर्लभ लोगों में से एक हैं जिन्होंने साबित किया कि संघर्ष आपकी राह रोक नहीं सकता, अगर आपके इरादे मजबूत हों। पंक्चर की दुकान पर काम करने से लेकर कोर्टरूम तक की उनकी यात्रा असाधारण और प्रेरणादायक है।

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अहद अहमद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज ज़िले के गाँव बरई हरख के रहने वाले हैं। यह एक छोटा सा ग्रामीण इलाका है, जहाँ के लोग साधारण जीवन जीते हैं और मेहनत को सबसे बड़ा मूल्य मानते हैं। इसी गाँव की मिट्टी ने दृढ़ निश्चय और संघर्ष से भरे एक ऐसे युवक को जन्म दिया जिसने आगे चलकर न्यायपालिका में प्रवेश कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया। बरई हरख गाँव के लोग अहद की सफलता को अपनी सफलता मान रहे हैं। उनके गाँव में खुशी की लहर है और बच्चे उनसे प्रेरित होकर पढ़ाई में रुचि दिखा रहे हैं। अहद की कहानी गाँव से लेकर शहरों तक एक उदाहरण बन गई है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, इच्छाशक्ति और मेहनत इंसान को बुलंदियों तक पहुँचा ही देती है।

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अहद अहमद बचपन से ही पिता के साथ पंक्चर की दुकान पर बैठते थे। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि पढ़ाई और घर चलाना दोनों ही चुनौती थे। अहद अक्सर दुकान पर आने-जाने वाले वाहनों के पंक्चर बनवाने का इंतज़ार करते हुए अपनी किताबें खोलकर पढ़ाई करते थे। परिवार में किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यही लड़का एक दिन जज बनेगा—वह भी पहला प्रयास और बिना एक भी कोचिंग क्लास लिए!

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अकसर सफलता के लिए महंगी कोचिंग और बड़े शहरों की सुविधाओं को जरूरी माना जाता है, लेकिन अहद की कहानी इस मिथक को तोड़ती है। उन्होंने इंटरनेट, पुरानी किताबों, लाइब्रेरी नोट्स और खुद की मेहनत के बल पर तैयारी की। आर्थिक तंगी कभी उनकी प्रेरणा को कमजोर नहीं कर सकी। कई बार बिजली न होने पर वे स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई करते थे। परिवार के पास संसाधन भले सीमित थे, लेकिन अहद के सपनों की उड़ान किसी सीमा को नहीं मानती थी।

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उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन तब रंग लाया जब उन्होंने पहले ही प्रयास में जज की परीक्षा शानदार सफलता के साथ पास की। सिर्फ अहद ही नहीं, उनका पूरा गाँव, जिला और राज्य गर्व से भर उठा। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि मंज़िल हमेशा उसी को मिलती है जो पूरी ईमानदारी और धैर्य के साथ रास्ते पर चलता है।

अहद अहमद की सफलता सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संदेश भी है कि संघर्ष, गरीबी या संसाधनों की कमी किसी को प्रतिभा और लगन से नहीं रोक सकती। उन्होंने यह दिखा दिया कि शिक्षा और आत्मविश्वास किसी भी कठिनाई को पार करने की ताकत रखते हैं। आज वह लाखों युवाओं के आदर्श बन चुके हैं और उनकी कहानी आने वाले समय में और भी लोगों को प्रेरित करती रहेगी।

Khursheed Khan Raju

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