अमेठी के जंगलरामनगर के किसान बैजनाथ मौर्या ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना से 0.50 हेक्टेयर में 200 कुंतल संकर लौकी उगाकर करीब 3.5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया!
अमेठी संवाददाता – मोहम्मद तौफीक
अमेठी, 30 जनवरी!
अमेठी जिले के एक साधारण किसान ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी किस्मत बदल दी है!
संकर लौकी की शानदार पैदावार से अमेठी चौंक उठी है और किसान की आमदनी में जबरदस्त उछाल आया है!
विकासखंड अमेठी के ग्राम जंगलरामनगर निवासी प्रगतिशील किसान बैजनाथ मौर्या ने मचान प्रणाली और ड्रिप सिंचाई अपनाकर नया मुकाम हासिल किया है!
मात्र 0.50 हेक्टेयर भूमि पर संकर लौकी की खेती कर उन्होंने लगभग 200 कुंतल (20 टन) उत्पादन किया और करीब 3.50 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है!
उनकी इस सफलता से क्षेत्र के अन्य किसानों में भी उत्साह का माहौल है!


यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किसान हितैषी नीतियों का जीवंत उदाहरण है!
बैजनाथ मौर्या ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सब्सिडी का लाभ उठाकर ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की और मचान पद्धति पर संकर लौकी की खेती शुरू की!
ड्रिप सिंचाई से कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हुआ और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर रही!

🌱 20 टन उत्पादन कर रचा इतिहास!
जायद मौसम में उच्च गुणवत्ता वाली संकर लौकी की किस्म लगाने से उन्हें जबरदस्त उत्पादन मिला!
इसके साथ ही उन्होंने इंटरक्रॉपिंग के तहत मचान के नीचे भिंडी, धनिया और मूली की खेती कर अतिरिक्त आय भी अर्जित की!
रबी मौसम में टमाटर, बैंगन, फूलगोभी और पत्तागोभी उगाकर उन्होंने सालभर सब्जी उत्पादन को जारी रखा!
💧 योजना अपनाने से दोगुना हुआ उत्पादन!
बैजनाथ मौर्या बताते हैं कि पहले पारंपरिक खेती में पानी की कमी और कम उत्पादन की समस्या रहती थी!
ड्रिप सिंचाई और मचान प्रणाली अपनाने से उत्पादन दोगुने से भी अधिक हो गया, जबकि पानी की खपत काफी कम हुई!
“पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना से सब्सिडी मिलने पर लागत घटी और मुनाफा बढ़ा!
🚜 किसानों के लिए प्रेरणा बने बैजनाथ!
मचान पर बेल वाली फसलों की खेती से भूमि का बेहतर उपयोग होता है और इंटरक्रॉपिंग से आय बढ़ती है!
यह तकनीक छोटे किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है!
बैजनाथ मौर्या आज क्षेत्र के किसानों को आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं!
जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि बैजनाथ की सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नई उम्मीद है!
यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण और सरकारी योजनाओं से किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं!
जंगलरामनगर का यह किसान अब पूरे जिले के लिए मिसाल बन चुका है!