हिंदी सिनेमा के प्रख्यात अभिनेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और करोड़ों दिलों की धड़कन धर्मेंद्र देओल के निधन ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। हिंदी सिनेमा के महानायक, रोमांस और एक्शन के प्रतीक, और करोड़ों दिलों के चहेते धर्मेंद्र देओल के निधन ने पूरे बॉलीवुड को शोक में डुबो दिया। फिल्म इंडस्ट्री से लेकर राजनीति और आम जनता तक, हर किसी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उनकी स्मृतियों और योगदान को याद करते हुए देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। धर्मेंद्र का जाना भारतीय सिनेमा के एक स्वर्णिम युग का अंत माना जा रहा है।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का 89 साल की उम्र में निधन हो गया है। लंबे समय से वे उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। ‘ही-मैन ऑफ बॉलीवुड’, ‘सदाबहार अभिनेता’ और लाखों दिलों की धड़कन रहे धर्मेंद्र के निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। फिल्म इंडस्ट्री से लेकर राजनीति और समाज के सभी वर्गों में शोक की लहर है। लेकिन यह खबर विशेष रूप से पंजाब के फगवाड़ा शहर के लिए गहरा सदमा लेकर आई है—वह शहर जहां धर्मेंद्र ने अपना बचपन बिताया और जहां उनकी यादें आज भी लोगों की बातों में ज़िंदा हैं।धर्मेंद्र के निधन की सूचना मिलते ही फगवाड़ा में शोक की लहर दौड़ गई। उनके बचपन के साथियों, स्कूल के सहयोगियों और मोहल्लेवालों ने भावुक होकर अपने ‘धरम’ को याद किया। कई लोगों ने कहा कि प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंचने के बाद भी धर्मेंद्र ने कभी अपने शहर और अपने दोस्तों से मुंह नहीं मोड़ा।

फगवाड़ा के लोग बताते हैं कि जब भी वे पंजाब आते थे, वे अपने बचपन के दोस्तों से मिलने के लिए जरूर समय निकालते थे। यही वजह है कि उनका जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं है, बल्कि फगवाड़ा के लिए यह अपना बेटा खोने जैसा दुख है।

धर्मेंद्र के पिता, मास्टर केवल कृष्ण चौधरी, फगवाड़ा के आर्य हाई स्कूल में गणित और सामाजिक अध्ययन पढ़ाते थे। धर्मेंद्र ने इसी स्कूल से 1950 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की और फिर 1952 तक रामगढ़िया कॉलेज से अपनी शिक्षा जारी रखी।
उनके सहपाठी और वरिष्ठ एडवोकेट एस.एन. चोपड़ा बताते हैं कि धर्मेंद्र में बचपन से ही एक अलग चमक थी—एक व्यक्तित्व जो भीड़ में भी अलग नजर आता था। लेकिन उन्हें देखकर कभी यह नहीं लगा कि बाद में वे देश के सबसे बड़े सितारों में से एक बनेंगे। चोपड़ा याद करते हुए कहते हैं कि “प्रसिद्धि ने कभी भी धर्मेंद्र की विनम्रता को नहीं बदला।”
पुराने दोस्तों से मिलने की चाह कभी खत्म नहीं हुई
हरजीत सिंह परमार बताते हैं कि जब भी धर्मेंद्र फगवाड़ा आते थे, वे बड़े स्टार की तरह नहीं बल्कि एक पुराने, सच्चे दोस्त की तरह मिलते थे। वे दोस्तों के साथ बैठकर बचपन के मजेदार किस्से सुनाते, स्कूल की शरारतें याद करते और खूब हंसी-मजाक करते थे। यह सब उनकी सादगी और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने के स्वभाव को दिखाता है।

रामलीला का किस्सा—मजाक और विनम्रता का अनोखा मिश्रण
धर्मेंद्र ने एक बार बताया था कि फिल्मों में आने से पहले उन्हें फगवाड़ा की कौमी सेवक रामलीला कमेटी में एक भूमिका के लिए चुना नहीं गया था। बाद में, जब वे बड़े सुपरस्टार बन गए, उन्होंने अपने दोस्तों को हँसी में पूछा – “आज तो मुझे रामलीला में रोल मिल ही जाएगा ना?”यह मजाकिया किस्सा न सिर्फ उनकी विनम्रता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सफलता ने उनके अंदर कभी घमंड नहीं आने दिया।
अपने प्रिय शहर के प्रति धर्मेंद्र का प्रेम साल 2006 में और भी उजागर हुआ, जब वे पुराने पैराडाइज थिएटर की जगह बने गुरबचन सिंह परमार कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन करने पहुंचे। हजारों लोगों की भीड़ के सामने जब धर्मेंद्र मंच पर आए, तो उन्होंने पूरे उत्साह के साथ कहा— “फगवाड़ा जिंदाबाद!”उनकी आवाज़ में जो अपनापन था, उसने पूरे शहर को गर्व से भर दिया।चाहे धर्मेंद्र दुनिया भर में मशहूर हो गए, चाहें उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में काम किया हो—फगवाड़ा हमेशा उनका अपना शहर बना रहा। वे जब भी आते, तो सबसे पहले अपने दोस्तों से मिलते, उनसे बातें करते और अपने बचपन और संघर्ष के दिनों को याद करते थे।

धर्मेंद्र का फगवाड़ा से जुड़ाव साबित करता है कि एक बड़ा स्टार भी अपनी जड़ों को कैसे संभाल कर रख सकता है। फगवाड़ा के लोग आज भी उन्हें गर्व और प्यार से याद करते हैं—न सिर्फ एक अभिनेता के रूप में, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में जिसने सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी अपनेपन को नहीं छोड़ा।
10 नवंबर को धर्मेंद्र की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत जानकर फगवाड़ा में स्थित मंदिरों और गुरुद्वारों में उनके बचपन के दोस्त और स्थानीय लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करने लगे थे। इस दौरान सोशल मीडिया पर उनके निधन की अफवाहें भी फैल गई थीं, जिन्हें बाद में खारिज किया गया और कुछ दिनों बाद उन्हें अस्पताल से घर भेज दिया गया था।

हालांकि, सोमवार को धर्मेंद्र के निधन की आधिकारिक पुष्टि होते ही फगवाड़ा में शोक की लहर दौड़ गई। उनके बचपन के साथी भावुक हो उठे और कई लोगों ने कहा कि उनका जाना एक युग का अंत है। फिल्ममेकर करण जौहर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर धर्मेंद्र के निधन की पुष्टि की, जिसके बाद पूरे देश में शोक संदेशों की बाढ़ आ गई।