रिपोर्ट :- खुशबू मिश्रा
क्राइम ब्रांच ने त्वचा रोगों में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाएं बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने लोनी स्थित फैक्ट्री से 2.3 करोड़ रुपये की फर्जी क्रीम, मशीनें और कच्चा माल बरामद कर दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था।

देश में नकली दवाओं का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है और यह आम लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इसी कड़ी में क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्यवाई करते हुए त्वचा रोगों में इस्तेमाल की जाने वाली नकली दवाएं बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान गौरव भगत और श्रीराम उर्फ विशाल गुप्ता के रूप में हुई है।
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले दो वर्षों से लोनी के मीरपुर हिन्दू गांव में स्थित एक फैक्ट्री में नकली दवाओं का निर्माण कर रहे थे। ये आरोपी प्रसिद्ध ब्रांडों की बेटनोवेट, स्किन शाइन और क्लोप-जी क्रीम जैसी त्वचा रोगों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की हूबहू नकल तैयार करते थे। इन नकली उत्पादों को असली पैकिंग में भरकर बाजार में सप्लाई किया जाता था, जिससे आम लोग आसानी से धोखा खा जाते थे।

पुलिस ने आरोपितों की निशानदेही पर करीब 2.3 करोड़ रुपये मूल्य की नकली दवाएं बरामद की हैं। इसके अलावा फैक्ट्री से पैकिंग मटेरियल, दवा बनाने की मशीनें, कच्चा माल और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए हैं। बरामद सामग्री से साफ है कि यह गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से काम कर रहा था।
बरामद की गई नकली दवाएं
- 3,770 ट्यूब स्किन शाइन क्रीम
- 2,720 ट्यूब क्लोप-जी क्रीम
- 22,000 खाली क्लोप-जी ट्यूब
- 1,200 ट्यूब बेटनोवेट-सी क्रीम

जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह केवल एक इलाके तक सीमित नहीं था। आरोपी अपने नेटवर्क के जरिए बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में इन नकली दवाओं की सप्लाई कर रहे थे। इन दवाओं को मेडिकल स्टोर्स और लोकल सप्लायर्स के माध्यम से बाजार में खपाया जाता था।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि नकली दवाएं बनाने और बेचने का यह नेटवर्क बेहद खतरनाक है। त्वचा रोगों में इस्तेमाल होने वाली ऐसी क्रीम सीधे तौर पर लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। नकली दवाओं के इस्तेमाल से एलर्जी, गंभीर स्किन इंफेक्शन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नकली दवाओं की पहचान करना आम उपभोक्ता के लिए बेहद मुश्किल होता है। यही वजह है कि इस तरह के गिरोह लंबे समय तक बिना पकड़े काम करते रहते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और किन मेडिकल दुकानों के माध्यम से ये दवाएं बेची जा रही थीं।
इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे केवल प्रमाणित मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें और किसी भी संदिग्ध पैकिंग या असामान्य दवा के बारे में तुरंत प्रशासन को सूचित करें। क्राइम ब्रांच का कहना है कि नकली दवाओं के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाईकी जाएगी।