जर्मनी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों को हैरान और मुस्कुराने दोनों पर मजबूर कर दिया है। यहाँ एक व्यक्ति ने डॉक्टर द्वारा बांझ घोषित किए जाने के बाद अपनी पत्नी को गर्भवती करने में मदद के लिए पड़ोसी की ‘सेवा’ ली। छह महीने तक लगातार प्रयासों के बाद भी पत्नी गर्भवती नहीं हुई, और जब बाद में पता चला कि पड़ोसी भी बांझ है, तो पति ने उस पर मुकदमा कर दिया। यह मामला न सिर्फ अजीब है, बल्कि कानूनी और नैतिक जटिलताओं पर भी दिलचस्प सवाल उठाता है।
जर्मनी में सामने आया यह अनोखा मामला इंसानी व्यवहार, रिश्तों और कानूनी दायित्वों की उलझनों का एक असामान्य उदाहरण है। कहानी की शुरुआत तब हुई जब एक व्यक्ति को डॉक्टरों ने बताया कि वह बांझ है और प्राकृतिक रूप से पिता नहीं बन सकता। बच्चे की चाहत में परेशान दंपत्ति ने एक अप्रत्याशित और असामान्य कदम उठाया—पति ने अपने पड़ोसी को ‘मदद’ करने के लिए नियुक्त कर लिया।

कैसे हुआ यह अनोखा ‘समझौता’?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पड़ोसी शारीरिक रूप से स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली वाला आदमी था, और दंपत्ति उसे एक संभावित उम्मीदवार मान बैठे। पति ने पड़ोसी से बातचीत की और उसे छह महीने तक अपनी पत्नी को गर्भवती करने के प्रयास करने के लिए तैयार कर लिया। समझौते के तहत तय हुआ कि पड़ोसी हफ़्ते में तीन बार प्रयास करेगा। यह अपने आप में एक बेहद असामान्य ‘कॉन्ट्रैक्ट’ जैसा था, लेकिन दोनों पक्षों की सहमति से इसे अंजाम दिया गया।
72 प्रयास… फिर भी सफलता नहीं
पड़ोसी ने पूरे छह महीने तक 72 प्रयास किए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। दंपत्ति परिणाम की उम्मीद में थे, लेकिन अंत में निराशा हाथ लगी। पत्नी के गर्भवती न होने पर पति को शक हुआ कि कहीं पड़ोसी ने भी प्रयासों को गंभीरता से तो नहीं लिया। लेकिन असली झटका तब लगा जब पता चला कि पड़ोसी भी बांझ है।

पति ने किया मुकदमा—‘आपने परिणाम नहीं दिया!’
क्रोधित पति ने आरोप लगाया कि पड़ोसी ने उसे धोखे में रखा। उसका कहना था कि उसने पड़ोसी को काम पर रखा था, और बदले में ‘परिणाम’ की उम्मीद की थी। लेकिन जब पड़ोसी खुद ही संतान उत्पन्न करने में अक्षम था, तो यह जानकारी पहले ही दे देनी चाहिए थी। पति ने पड़ोसी पर मुकदमा कर दिया, दावा किया कि उसने “अपना वादा पूरा नहीं किया।”
पड़ोसी का बचाव—मैंने ‘कोशिश’ का वादा किया था, ‘सफलता’ का नहीं
मुकदमे में पड़ोसी का जवाब उतना ही चौंकाने वाला था। उसने कहा:
- उसने कभी गर्भधारण की गारंटी नहीं दी थी
- वह केवल प्रयास करने के लिए तैयार हुआ था
- परिणाम प्राकृतिक प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं
उसने तर्क दिया कि उसने अपनी तरफ़ से समझौते के अनुसार काम किया, और वह कानूनी रूप से असफल परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

कानूनी और नैतिक सवाल
यह मामला कई गंभीर सवालों को जन्म देता है:
- क्या ऐसे ‘व्यक्तिगत’ समझौते कानूनी तौर पर मान्य माने जा सकते हैं?
- क्या किसी प्राकृतिक प्रक्रिया के परिणाम को अनुबंध का हिस्सा बनाया जा सकता है?
- क्या पड़ोसी पर अपनी चिकित्सीय स्थिति छुपाने का आरोप सही है?
- क्या पति के ‘हायरिंग’ के इस फैसले पर नैतिक जिम्मेदारी बनती है?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रायः अदालतें परिणाम की गारंटी को मान्यता नहीं देतीं, क्योंकि गर्भधारण एक निश्चित परिणाम वाला काम नहीं है।