पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत और मौजूदगी को लेकर अटकलों के बीच अब उनके बेटे कासिम खान ने खुला विवाद खड़ा कर दिया है। 73 वर्षीय इमरान पर अफगान मीडिया द्वारा प्रसारित “मृत्यु” की रिपोर्ट के बाद से उठ रही शंकाओं के बीच कासिम ने “जिंदा होने का सबूत” मांगा है। परिवार से मिलने की अनुमति न दिए जाने, इस मौत की कोठरी में बंद रखने और स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी छिपाए जाने के आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
पाकिस्तान में 2025 के आखिरी हफ्तों में राजनीतिक हलचल तेज है। 2023 में गिराती कार्रवाई के बाद जेल में बंद इमरान खान अब कई तरह के दावों और आरोपों की चपेट में आ चुके हैं। सबसे ताज़ा विवाद तब उठा, जब अफगान मीडिया में एक अनपुष्ट रिपोर्ट आई कि “अदियाला जेल में इमरान खान का निधन हो गया” है। इस रिपोर्ट ने सिर्फ पाकिस्तान में नहीं — बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हड़कंप मचा दिया।

बेटे का आरोप — “हमें नहीं मिला कोई सबूत कि वह जीवित हैं”
इमरान के बेटे कासिम खान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उनके पिता को अब तक 845 दिन हो चुके हैं, और “पिछले छह हफ्तों से” उन्हें एक “मौत की कोठरी (death cell)” में अलग-थलग रखा गया है। कासिम ने कहा कि उन्हें, उनके भाई को और इमरान की बहनों को – कोर्ट के निर्देशों के बावजूद – पिता से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। न कोई फोन कॉल, न मुलाकात, न ही स्वास्थ्य की कोई जानकारी मिली। कासिम ने दुनिया से अपील की है कि अगर उनके पिता जीवित हैं, तो सरकार या जेल प्रशासन “जिंदा होने का कोई सबूत” पेश करे – एक फोटो, वीडियो या स्वास्थ्य रिपोर्ट।

जेल प्रशासन का बयान: “इमरान पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं”
वहीं दूसरी तरफ, जेल अधिकारियों और पाकिस्तान सरकार ने इन अफवाहों को “बेनियाद” बताया है। वे कहते हैं कि इमरान खान अदियाला जेल में ही हैं, उन्हें नियमित मेडिकल देखभाल मिल रही है और उनका स्वास्थ्य ठीक है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने तो यह भी दावा किया कि खान को जेल में फाइव-स्टार सुविधाएं दी गई हैं, जिसमें बेहतर खाना, स्वास्थ्य देखभाल, डबल-बेड और अन्य मूलभूत सुविधाएं शामिल हैं।

मुलाकात व पारदर्शिता पर है विस्तृत विवाद
परिवार की ओर से आरोप है कि तीन सप्ताह से भी अधिक वक्त से उन्हें जेल में इमरान से मिलने नहीं दिया जा रहा। उनकी बहन ने इस संबंध में अप्रैल 2025 में दिए गए कोर्ट के आदेश की अवहेलना का दावा करते हुए जेल अधीक्षक के विरुद्ध अपमान याचिका दायर की है। उनके वकीलों और पार्टी नेताओं का कहना है कि इमरान की असलियत का पता लगाने के लिए केवल एक ताज़ा फोटो या वीडियो ही पर्याप्त होगा – इतना ही भर।

सवाल — क्या समय ने ढँक दी सच्चाई?
यह पूरा विवाद इसलिए और संवेदनशील बन गया है क्योंकि इमरान खान केवल एक आम राजनेता नहीं — देश की राजनीति का एक बड़ा चेहरा रहे हैं। उनकी हालत, उनकी मानवाधिकार स्थिति और उनकी पहुंच से वंचित किए जाने का आरोप — ये सब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों, न्याय और राजनीतिक आज़ादी की बहस को फिर से जन्म दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर परिवार को जेल में मिलने नहीं दिया जा रहा, और जेल प्रशासन सिर्फ बयान दे रहा — तो यह “पारदर्शिता की कमी” है। उन्होंने मांग की है कि कम से कम कोई वीडियो कॉल या ताज़ा तस्वीर जारी की जाए, ताकि एहतियात के नाम पर अफवाहों को दम न मिले।

राजनीतिक और सामाजिक असर
इस विवाद ने पाकिस्तानी राजनीति में नई हलचल ला दी है। विपक्ष, मानवाधिकार संगठन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं कि — क्या इमरान खान को सुरक्षा या राजनैतिक बंदी के रूप में अलग-थलग रखा जा रहा है? क्या उनका यह व्यवहार तमाम रूल ऑफ लॉ और जेल मानवाधिकारों के नियमों का उल्लंघन नहीं है? उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर हैशटैग #WhereIsImranKhan चलाया है। उन्होंने कहा है कि केवल एक सार्वजनिक बयान से अब काम नहीं चलेगा — कोई स्पष्ट और विश्वसनीय सबूत पेश किया जाए।