क्या IVF उपचार के बाद महिलाओं में TB का जोखिम बढ़ जाता है? लखनऊ के KGMU और चंडीगढ़ PGI द्वारा की गई एक नई स्टडी ने चौंकाने वाले और चिंताजनक तथ्य उजागर किए हैं। 73 महिलाओं पर किए गए इस शोध में पाया गया कि IVF के 11–19 हफ्तों के भीतर कई महिलाएं TB के गंभीर रूपों की चपेट में आ गईं।
इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी IVF आज लाखों महिलाओं के लिए मातृत्व का रास्ता खोल रहा है। लेकिन इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर हाल ही में सामने आई एक स्टडी ने कई नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) और PGI चंडीगढ़ ने मिलकर 73 महिलाओं पर शोध किया, जिसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे।

स्टडी में शामिल सभी महिलाएं 32 वर्ष से अधिक आयु की थीं और IVF उपचार के 11 से 19 सप्ताह के बीच उनमें TB के लक्षण दिखाई देने लगे। इससे पहले तक इन महिलाओं को कभी टीबी नहीं हुई थी, इसलिए अचानक संक्रमण का होना विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का विषय बन गया।
🔍 क्या पाया गया स्टडी में?
शोध में पता चला कि IVF कराने वाली इन महिलाओं में 27% मामलों में गंभीर प्रकार की TB पाई गई।
इनमें शामिल थीं:
- जननांग TB (Genital Tuberculosis)
- CNS TB (दिमाग से जुड़ी TB)
- मिलेरी TB (पूरे शरीर में फैलने वाली TB)
ये TB के ऐसे रूप हैं जो गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे दोनों के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण माने जाते हैं।

🔥 इलाज मिला, पर कई महिलाएं फिर भी खतरे में रहीं
स्टडी में सामने आया कि कुल मरीजों में से:
- 80% महिलाओं को TB का उपचार मिला,
- जबकि 20% महिलाओं ने इलाज शुरू नहीं किया या बीच में छोड़ दिया।
सबसे गंभीर बात यह रही कि 8% महिलाओं में ड्रग-रेसिस्टेंट TB पाई गई, यानी ऐसी TB जिस पर सामान्य दवाओं का असर नहीं होता। यह गर्भावस्था में जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है।

👶 नवजात बच्चों पर भी पड़ा प्रभाव
स्टडी के आंकड़े और भी चिंताजनक हो जाते हैं जब नवजात शिशुओं पर इसके प्रभाव की बात आती है। TB संक्रमित महिलाओं से जन्मे 10% नवजात बच्चे भी TB की चपेट में आए। कुल 73 महिलाओं में से:
- 55 महिलाओं ने जीवित शिशुओं को जन्म दिया,
- जबकि 18 मामलों में नवजात मृत पैदा हुए।
डॉक्टरों का कहना है कि TB का समय से पता न चलना और इलाज देर से शुरू होना, नवजात मृत्यु दर बढ़ाने का बड़ा कारण बन सकता है।

🥼 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
डॉक्टरों के अनुसार IVF प्रोग्राम से पहले केवल बेसिक ब्लड टेस्ट ही नहीं बल्कि TB की पूरी जांच अनिवार्य होनी चाहिए।
TB के बैक्टीरिया कई बार शरीर में सुप्त अवस्था में रहते हैं और IVF द्वारा होने वाले हार्मोनल बदलाव इन्हें सक्रिय कर सकते हैं।KGMU के विशेषज्ञों के मुताबिक: “IVF से पहले TB की प्री-कॉन्सेप्शन स्क्रीनिंग हर महिला के लिए जरूरी है। इससे मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है।”
⚠ IVF कराने वाली महिलाओं के लिए सलाह
यदि आप IVF की योजना बना रही हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- IVF शुरू करने से पहले TB की जांच अवश्य कराएं
- वजन कम होना, लंबे समय तक खांसी, कमजोरी जैसे लक्षणों को हल्के में न लें
- किसी भी संक्रमण की स्थिति में IVF को थोड़े समय के लिए टाला जा सकता है
- TB का उपचार गर्भावस्था में संभव है—लेकिन डॉक्टर की निगरानी अनिवार्य है

❤️ मातृत्व से बड़ा कोई सुख नहीं—लेकिन स्वास्थ्य सबसे ज़रूरी
IVF मातृत्व का एक वैज्ञानिक और सुरक्षित रास्ता है, लेकिन जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। KGMU–PGI स्टडी ने स्पष्ट कर दिया है कि TB जैसे संक्रमण IVF प्रक्रिया के दौरान सक्रिय हो सकते हैं और इसका प्रभाव गंभीर हो सकता है। इसलिए IVF की प्लानिंग कर रही हर महिला को TB स्क्रीनिंग को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्वास्थ्य ही सुरक्षित मातृत्व की सबसे बड़ी नींव है।