मध्य प्रदेश का अनोखा झिरी गाँव जहाँ संस्कृत बोलना है रोज़मर्रा की आदत

रिपोर्ट :- खुशबू मिश्रा

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित झिरी गाँव अपनी अनोखी विशेषता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यह गाँव केवल एक आम ग्रामीण क्षेत्र नहीं, बल्कि एक ऐसा स्थान है जहाँ संस्कृत भाषा न केवल पढ़ाई जाती है बल्कि दैनिक जीवन में जीवंत रूप से उपयोग की जाती है। यहाँ के निवासी, चाहे बच्चे हों या बुजुर्ग, हर बातचीत में संस्कृत का प्रयोग करते हैं, जिससे यह गाँव भाषा प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

झिरी गाँव, मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में बसा एक छोटा सा गाँव है, जिसकी आबादी लगभग 1,500 है। लेकिन इसकी छोटी आबादी के बावजूद यह गाँव पूरे देश में अपनी विशिष्ट भाषा संस्कृति के कारण जाना जाता है। झिरी गाँव में अधिकांश लोग अपने दैनिक जीवन में संस्कृत भाषा का प्रयोग करते हैं। यहाँ की दुकानों में ग्राहक और दुकानदार संस्कृत में बातचीत करते हैं, खेतों में किसान एक-दूसरे से संस्कृत में संवाद करते हैं, और घरों में भी परिवार के सदस्य संस्कृत बोलते हैं।

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यहाँ तक कि गाँव के घरों के नाम भी संस्कृत में लिखे गए हैं। कई घरों के बाहर आप ‘संस्कृत गृहम’ जैसी पट्टियाँ देख सकते हैं। यह दर्शाता है कि इस गाँव में संस्कृत केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं है, बल्कि यह यहाँ की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है।

झिरी गाँव की सुबह की शुरुआत भी काफी अनोखी है। यहाँ के लोग एक-दूसरे को ‘गुड मॉर्निंग’ कहने के बजाय ‘नमो-नमः’ से शुभकामनाएँ देते हैं। यह सरल सा अभिवादन दर्शाता है कि गाँव में संस्कृत भाषा कितनी गहराई से रची-बसी है। गाँव की महिलाओं, बच्चों और नौकरीपेशा लोगों तक में संस्कृत का प्रयोग देखा जा सकता है। यहाँ का सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन संस्कृत भाषा से जुड़ा हुआ है।

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गाँव के स्कूलों में संस्कृत प्राथमिक भाषा के रूप में पढ़ाई जाती है। बच्चे संस्कृत में गणित, विज्ञान और सामान्य विषयों की शिक्षा प्राप्त करते हैं। इस वजह से नई पीढ़ी भी इस प्राचीन भाषा में निपुण हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के लिए संस्कृत सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि उनके सोचने और संवाद करने का माध्यम बन गई है।

झिरी गाँव की यह अनोखी पहल न केवल स्थानीय लोगों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। कई भाषा विशेषज्ञ और विश्वविद्यालय के शोधार्थी यहाँ आते हैं ताकि वे देखें कि कैसे एक पूरा गाँव संस्कृत को अपनी जीवनशैली में जीवंत रख सकता है।

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इस गाँव की जीवनशैली दर्शाती है कि संस्कृत केवल शास्त्रीय ग्रंथों तक सीमित नहीं है। झिरी गाँव में यह भाषा बोलने, सीखने और संवाद करने का माध्यम बन चुकी है। यहाँ के निवासियों का यह प्रयास प्राचीन भारतीय संस्कृति को आधुनिक युग में जीवित रखने की मिसाल है।

झिरी गाँव की कहानी हमें यह सिखाती है कि भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं होती, बल्कि यह जीवन, संस्कृति और परंपरा का हिस्सा भी होती है। इस गाँव ने यह साबित किया है कि अगर समुदाय और शिक्षा में सही प्रयास किए जाएं तो प्राचीन भाषाएँ भी जीवित और आधुनिक जीवन में प्रासंगिक रह सकती हैं।

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अगर आप भारतीय संस्कृति और भाषाओं के अध्ययन में रुचि रखते हैं, तो झिरी गाँव एक ऐसा स्थान है जिसे जरूर देखा जाना चाहिए। यहाँ की सरल और समर्पित जीवनशैली, संस्कृत भाषा की प्रगाढ़ता, और सामाजिक जीवन के अनोखे पहलू इसे पूरे देश में विशिष्ट बनाते हैं।

Khursheed Khan Raju

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