अमेठी संवाददाता :- मोहम्मद तौफ़ीक़
अमेठी के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय शुकुल बाज़ार में छात्राओं द्वारा दो शिक्षिकाओं पर गंभीर उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है। छात्राओं ने इन आरोपों के विरोध में थाना शुकुल बाज़ार का घेराव किया और परिजनों ने भी थाने पर प्रदर्शन कर रोड जाम किया। आरोपों में जातिसूचक टिप्पणियाँ, नाम काटने की धमकी, मानसिक प्रताड़ना और छात्रों को आपस में भड़काने जैसी बातें शामिल हैं। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हुए हैं।
अमेठी में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय शुकुल बाज़ार में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब विद्यालय की कई छात्राओं ने अपनी शिक्षिकाओं के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए थाना शुकुल बाज़ार का घेराव कर दिया। यह मामला उस समय और तूल पकड़ गया , जब परिजन भी थाने पहुँच गए और उन्होंने प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दी। छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों ने विद्यालय प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को सक्रिय कर दिया है।

आरोपों की शुरुआत कैसे हुई?
छात्राओं का कहना है कि विद्यालय में कार्यरत दो शिक्षिकाएँ, विशेष रूप से नीतू श्रीवास्तव, लंबे समय से छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार कर रही थीं। आरोपों के अनुसार शिक्षिका नीतू श्रीवास्तव द्वारा जातिसूचक गालियाँ दी जाती थीं और छात्राओं को नाम काटने की धमकी भी दी जाती थी। छात्राओं का दावा है कि वे लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना झेल रही हैं, जिसके कारण विद्यालय वातावरण असुरक्षित महसूस होने लगा था।
छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित शिक्षिकाएँ सहपाठी छात्राओं को उकसाकर उनसे गाली-गलौज और मारपीट करवाती थीं। उनका कहना है कि इस माहौल में वे शांतिपूर्वक पढ़ाई नहीं कर पा रही थीं और शिक्षकों के डर के कारण किसी से शिकायत भी नहीं कर पाती थीं। कई छात्राओं ने प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया कि यह स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी और मानसिक तनाव बढ़ रहा था, जिसके चलते उन्हें सामूहिक रूप से विरोध करना पड़ा।

परिजनों की शिकायत और थाने का घेराव
छात्राओं के परिजन, विशेषकर राहुल बौद्ध ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए अनुरोध किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना था कि बच्चियों ने कई बार घर जाकर बताया कि विद्यालय में उनके साथ गलत व्यवहार होता है, लेकिन उन्होंने सोचा कि बात छोटी-मोटी अनुशासनात्मक होगी। लेकिन जब बच्चियाँ थाने पहुंची और बड़ी संख्या में छात्राओं ने समान शिकायतें कीं, तब स्थिति गंभीर प्रतीत हुई। थाने के बाहर जुटे परिजनों और ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए कुछ समय के लिए रोड भी जाम कर दिया। भीड़ बढ़ने पर पुलिस कर्मचारियों को स्थिति संभालनी पड़ी।

शिक्षिकाओं और वार्डन के मनमुटाव का भी जिक्र
प्रार्थना पत्र में छात्राओं ने यह भी बताया कि विद्यालय की वार्डन और शिक्षिकाओं के बीच भी मनमुटाव चल रहा है, जिसका असर छात्राओं पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि शिक्षिकाएँ अक्सर वार्डन से हुई नाराज़गी निकालने के लिए छात्राओं पर कड़ी कार्यवाई करती थीं या उन्हें मानसिक रूप से दबाव में रखने का प्रयास करती थीं। मामले की जानकारी मिलते ही खंड शिक्षा अधिकारी शैलेंद्र शुक्ला और थाना अध्यक्ष विवेक वर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्राओं और परिजनों को शांत कराने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी। अधिकारियों ने सभी पक्षों के बयान दर्ज करने की बात कही और विद्यालय प्रशासन से भी जानकारी ली।

फिलहाल अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि आरोप कितने गंभीर हैं और क्या यह वास्तव में छात्राओं पर अत्याचार का मामला है या विद्यालय के अंदरूनी विवाद का प्रभाव छात्रों पर पड़ा है।अधिकारी मौजूद रहे, जिसके बाद धीरे-धीरे माहौल शांत हुआ और छात्राओं को विद्यालय भेज दिया गया। जांच रिपोर्ट आने तक विद्यालय प्रशासन से कहा गया है कि माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखा जाए और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।