रिपोर्ट :- खुशबू मिश्रा
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल मामले में आधुनिक मैग्नेट तकनीक की मदद से कटी पित्त नली को सफलतापूर्वक जोड़कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सुलतानपुर की 32 वर्षीय महिला की निजी अस्पताल में सर्जरी के दौरान पित्त नली कट गई थी, जिसके कारण पित्त पेट में फैलने लगा और वह गंभीर पीलिया की चपेट में आ गई। केजीएमयू की विशेषज्ञ टीम ने बिना बड़ा ऑपरेशन किए दो चुंबकों की सहायता से नली को फिर से जोड़ा और मरीज को स्वस्थ होने में मदद मिली।
पित्त नली का कट जाना चिकित्सा विज्ञान में गंभीर और जटिल स्थिति मानी जाती है। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति में बड़ा ऑपरेशन करना आवश्यक होता है, जिसमें मरीज को लंबे समय तक दर्द, संक्रमण और कई जोखिमों का सामना करना पड़ता है। लेकिन लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) ने एक ऐसी तकनीक का उपयोग करके चिकित्सा जगत में महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की है, जिसने मरीज की जान बचाने के साथ-साथ उसे बड़े ऑपरेशन की पीड़ा से भी सुरक्षित रखा।

मामले की शुरुआत कैसे हुई?
सुलतानपुर निवासी 32 वर्षीय महिला को पित्त की थैली में पथरी की समस्या थी। परिजन उसे एक निजी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी। परिवार ने ऑपरेशन की अनुमति दी, लेकिन सर्जरी के दौरान एक गंभीर गलती हो गई—पित्त की नली कट गई।
पित्त नली कटने का प्रभाव बेहद खतरनाक होता है—
- पित्त पेट में फैलने लगता है
- संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है
- पीलिया तेजी से बढ़ता है
- खून में पित्त मिलने से हालत गंभीर हो सकती है
महिला की हालत लगातार बिगड़ने लगी और वह गंभीर पीलिया की चपेट में आ गई। परिजन उसे तुरंत केजीएमयू लेकर पहुंचे।
केजीएमयू की टीम ने संभाली जिम्मेदारी
केजीएमयू पहुंचने पर मामला मेडिसिन विभाग के डॉ. अजय कुमार पटवा और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. सौरभ कुमार की टीम को सौंपा गया। टीम ने जांच के बाद पाया कि पित्त नली पूरी तरह से कट चुकी है और पारंपरिक बड़े ऑपरेशन से जोखिम काफी बढ़ सकता है। ऐसे में डॉक्टरों ने एक आधुनिक और कम दर्द वाली तकनीक का चयन किया—
मैग्नेट (चुंबक) तकनीक।

कैसे जुड़ी कटी हुई पित्त नली? तकनीक बेहद अनोखी
डॉक्टरों ने दो विशेष चुंबकों की मदद से एक अत्यंत सटीक प्रक्रिया अपनाई।
- पहला चुंबक एंडोस्कोपी की मदद से पित्त नली में डाला गया।
- दूसरा चुंबक इमेज गाइडेंस के माध्यम से सुई की मदद से लिवर के रास्ते डाला गया।
- दोनों चुंबक शरीर के अंदर एक-दूसरे से जुड़ गए।
- चुंबक की शक्ति ने नली के दोनों कटे हिस्सों को पास लाकर जोड़ने में मदद की।
इस तरह बिना चीरा लगाए या बड़ा ऑपरेशन किए पित्त नली दोबारा सही मार्ग पर आ गई। प्रक्रिया सफल होने के बाद महिला के पीलिया में तेजी से सुधार हुआ।
- पित्त का रिसाव बंद हुआ
- संक्रमण कम हुआ
- शरीर की कार्यप्रणालियों ने सामान्य गति से काम करना शुरू किया
डॉक्टरों के अनुसार मरीज अब स्वस्थ होने की ओर तेजी से बढ़ रही है और आगे किसी बड़े ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मैग्नेट तकनीक क्यों है खास?
यह तकनीक कई कारणों से चिकित्सा जगत में उपयोगी मानी जा रही है:
- बड़ा ऑपरेशन नहीं करना पड़ता
- मरीज को कम दर्द झेलना पड़ता है
- रिकवरी समय कम होता है
- संक्रमण का खतरा काफी कम
- जटिल मामलों में भी सफल
केजीएमयू की यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।