मेरठ: नगर निगम की पार्षद कार्यकारिणी के चुनाव में बुधवार को भारी हंगामा देखने को मिला। निर्धारित समय से सवा घंटे बीत जाने के बाद भी मतदान शुरू नहीं हो सका, जिससे पार्षदों और अधिकारियों के बीच तनावपूर्ण माहौल बन गया। पार्षदों ने देरी पर आपत्ति जताई और मतदान केंद्र में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। मतदान केंद्र पर राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, लोकसभा सांसद अरुण गोविल और एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज भी उपस्थित थे। लेकिन निर्धारित समय पर मतदान शुरू न होने से सभी नेताओं में नाराजगी बढ़ गई। डॉ. वाजपेयी ने चुनाव अधिकारी से बैलेट पेपर मांगा, लेकिन अधिकारी ने बैलेट पेपर उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद सांसद का पारा चढ़ गया और उन्होंने अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी।

डॉ. वाजपेयी ने कहा, “या तो बैलेट पेपर दो या यहां से चले जाओ। अगर व्यवस्था नहीं सुधरी तो मैं यहां तक कि मेज पलटने का कदम उठा सकता हूं।” इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना दिया। मतदान में हुई देरी ने पूरे केंद्र का माहौल तनावपूर्ण बना दिया। स्थानीय पार्षदों और मतदाताओं ने अधिकारियों की इस लापरवाही पर सवाल उठाए। पार्षदों का कहना था कि समय पर मतदान सुनिश्चित न होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और चुनाव में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। चुनाव अधिकारीयों का कहना था कि तकनीकी कारणों और मतदाता सूची अपडेट में देरी के कारण मतदान शुरू होने में समय लगा। इसके बावजूद, नेताओं और पार्षदों का यह आरोप है कि प्रशासनिक ढिलाई के चलते यह स्थिति बनी और इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नगर निगम चुनाव में इस तरह की देरी न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि आम जनता और स्थानीय नेताओं के विश्वास को भी प्रभावित करती है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए चुनाव प्रक्रिया में समयबद्धता और पूरी तरह से तैयार प्रशासनिक व्यवस्था होना अनिवार्य है। नगर निगम चुनाव में पारदर्शिता और समयबद्ध मतदान को लेकर यह घटना एक चेतावनी के रूप में सामने आई है। अब देखना यह है कि अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और आगामी चुनावों में ऐसी व्यवस्थागत चूक को कैसे रोका जा सकता है।