नरसिंहपुर के कांकरिया परिवार ने एक साहसिक और प्रेरणादायक कदम उठाते हुए 16 जनवरी को जैन दीक्षा लेने का निर्णय लिया है। दिनेश, अनामिका, डॉ. हर्षिता और सीए विधान ने अपने पांच करोड़ रुपये की संपत्ति छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपनाने का फैसला किया। परिवार की एक बेटी साध्वी शाश्वत निधि पहले ही दीक्षित हो चुकी हैं। समारोह पालीताणा, गुजरात में आयोजित होगा।नरसिंहपुर के कांकरिया परिवार ने समाज में एक अद्वितीय और प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित किया है। 16 जनवरी 2025 को दिनेश कांकरिया, उनकी पत्नी अनामिका कांकरिया, उनकी बेटी डॉ. हर्षिता और पुत्र सीए विधान जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे। यह परिवार अपनी पांच करोड़ की संपत्ति और भौतिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर पूर्ण रूप से संन्यास का मार्ग अपनाने जा रहा है।

परिवार की एक बेटी साध्वी शाश्वत निधि पहले ही दीक्षित हो चुकी हैं। उनकी दीक्षा ने परिवार और समाज के बीच आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित किया। कांकरिया परिवार का यह कदम यह संदेश देता है कि भौतिक संपत्ति और सांसारिक जिम्मेदारियों से परे, आत्मिक उन्नति और साधना ही जीवन का उच्चतम लक्ष्य हो सकता है।
जैन धर्म में दीक्षा एक महत्वपूर्ण और पवित्र प्रक्रिया है। दीक्षित व्यक्ति अपने पूरे जीवन को धर्म, संयम और साधना के लिए समर्पित कर देता है। दीक्षा ग्रहण करने वाले व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति करना होता है। कांकरिया परिवार के इस कदम से न केवल उनके निजी जीवन में बदलाव आएगा, बल्कि यह समाज में भी आध्यात्मिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देगा।

कांकरिया परिवार की प्रेरणादायक यात्रा छोटे से समुदाय के लिए मिसाल साबित हो रही है। उन्होंने सभी भौतिक संपत्तियों और सामाजिक जिम्मेदारियों को छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाने का निर्णय लिया। यह कदम केवल व्यक्तिगत साधना नहीं बल्कि समाज में नैतिक और आध्यात्मिक संदेश फैलाने का माध्यम भी है।
समारोह पालीताणा, गुजरात में आयोजित किया जाएगा। पालीताणा जैन धर्म के अनुयायियों के बीच आध्यात्मिक कार्यक्रमों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आयोजित दीक्षा समारोह में जैन संत और प्रमुख धर्मगुरु उपस्थित रहेंगे। दीक्षा प्रक्रिया के दौरान कांकरिया परिवार के सदस्य आध्यात्मिक अनुशासन, ध्यान और साधना की विधियों को अपनाएंगे।
इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों से लोग उपस्थित होंगे। स्थानीय समुदाय, परिवार और अन्य जैन अनुयायी इस प्रेरणादायक घटना का साक्षी बनने के लिए इकट्ठा होंगे। यह केवल एक पारिवारिक उत्सव नहीं बल्कि समाज में धर्म और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाला कार्यक्रम होगा।

कांकरिया परिवार की दीक्षा केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को नहीं बदल रही, बल्कि यह समाज में भी एक संदेश छोड़ रही है। आज के समय में जब भौतिक सुख-सुविधाएँ और संपत्ति ही प्राथमिकता बन चुकी हैं, ऐसे में एक परिवार द्वारा पांच करोड़ की संपत्ति छोड़कर संन्यास लेना वास्तव में प्रेरणादायक कदम है। यह सभी को यह याद दिलाता है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति है।
परिवार ने अपनी तैयारी के दौरान समाज के विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक गुरुओं से मार्गदर्शन लिया। उन्होंने दीक्षा ग्रहण करने से पहले आत्मचिंतन और ध्यान के माध्यम से मानसिक और आध्यात्मिक तैयारी पूरी की। इस तैयारी में परिवार ने अपनी दैनिक जीवनशैली, भोजन और कार्यों में संयम और साधना को प्रमुखता दी।
कांकरिया परिवार की यह यात्रा न केवल स्थानीय समुदाय के लिए बल्कि पूरे जैन धर्म के अनुयायियों के लिए प्रेरणादायक है। यह दिखाता है कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों और व्यस्तताओं के बावजूद, व्यक्ति अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा में मोड़ सकता है।
समारोह के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ आध्यात्मिक प्रवचन और साधना के सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। जैन संत और धर्मगुरु परिवार और उपस्थित लोगों को दीक्षा के महत्व और साधना के मार्ग के बारे में बताएंगे। यह अनुभव सभी उपस्थित लोगों के लिए सीखने और प्रेरित होने का अवसर होगा।

कांकरिया परिवार की यह दीक्षा भविष्य में समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगी। उनके कदम से युवा पीढ़ी को यह संदेश मिलेगा कि भौतिक संपत्ति और सांसारिक इच्छाओं से परे, आध्यात्मिक जीवन अपनाना और धर्म के मार्ग पर चलना सबसे महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार, नरसिंहपुर के कांकरिया परिवार का यह कदम न केवल व्यक्तिगत जीवन का आध्यात्मिक उत्कर्ष है बल्कि समाज और धर्म के लिए भी एक प्रेरणा है। यह कदम दिखाता है कि जीवन में सच्ची पूर्ति केवल भौतिक सुख में नहीं बल्कि आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति में निहित है।
अंततः, कांकरिया परिवार की जैन दीक्षा 16 जनवरी को पालीताणा, गुजरात में आयोजित होगी। यह कार्यक्रम न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक प्रेरणास्रोत बन जाएगा। उनके इस साहसिक और प्रेरणादायक कदम से यह संदेश जाता है कि जीवन में आध्यात्मिकता और साधना ही सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए।