05 मई 2026

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव 2026 के फाइनल नतीजे

लेखक न्यूज़ डेस्क · 5 मई 2026, 10:42

देश के पांच अहम राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव 2026 के फाइनल नतीजे अब पूरी तरह सामने आ चुके हैं… और इस बार के जनादेश ने कई राज्यों में सियासत की तस्वीर ही बदल दी है। कहीं सत्ता का बड़ा बदलाव हुआ है, तो कहीं नए चेहरे ने पुराने समीकरण तोड़ दिए हैं। इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि मतदाता इस बार बदलाव के मूड में था और उसने कई जगहों पर चौंकाने वाले फैसले दिए हैं।

सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला है। 15 साल से सत्ता पर काबिज़ तृणमूल कांग्रेस को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा है। भारतीय जनता पार्टी ने 206 सीटों के साथ शानदार और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। 294 सीटों वाले इस राज्य में बहुमत का आंकड़ा 148 है, जिसे बीजेपी ने बहुत बड़े अंतर से पार किया है। यह नतीजा सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक युग के अंत और नए दौर की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह जीत बीजेपी के लिए पूर्वी भारत में मजबूत पकड़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अब बात तमिलनाडु की… जहां इस बार सबसे बड़ा सियासी सरप्राइज सामने आया है। सुपरस्टार से नेता बने जोसेफ़ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम ने पहली ही चुनावी परीक्षा में 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया है और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है, यानी सरकार बनाने के लिए टीवीके को सहयोगियों की जरूरत होगी। वहीं सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम 59 सीटों पर सिमट गई और एआईएडीएमके को 47 सीटें मिली हैं। इस नतीजे ने साफ कर दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति में अब एक नया केंद्र बन चुका है और आने वाले समय में गठबंधन की राजनीति यहां निर्णायक होगी।

असम में तस्वीर पूरी तरह साफ और स्थिर नजर आई। यहां भारतीय जनता पार्टी ने 82 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल कर लगातार अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है। कांग्रेस 19 सीटों पर सिमट गई, जबकि अन्य दलों का प्रदर्शन सीमित रहा। 126 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 64 है, जिसे बीजेपी ने आराम से पार कर लिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि असम में मतदाताओं ने स्थिरता और निरंतरता को प्राथमिकता दी है।

केरल में इस बार बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। कांग्रेस 63 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि वाम मोर्चा—खासतौर पर CPI(M)—26 सीटों पर सिमट गया है। 140 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 71 है, ऐसे में सरकार बनाने के लिए यहां भी सहयोगियों की भूमिका अहम होगी। लेकिन यह साफ है कि केरल की राजनीति में इस बार सत्ता परिवर्तन की लहर दिख रही है और लंबे समय से चली आ रही सत्ता की पकड़ कमजोर पड़ी है।

वहीं पुडुचेरी में भी मुकाबला दिलचस्प रहा। AINRC ने 12 सीटों के साथ बढ़त बनाई है, जबकि डीएमके, बीजेपी और निर्दलीय उम्मीदवारों को सीमित सीटें मिली हैं। 30 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 16 है, ऐसे में यहां सरकार गठन के लिए गठबंधन बेहद अहम हो गया है और आने वाले दिनों में राजनीतिक जोड़-तोड़ देखने को मिल सकती है।

कुल मिलाकर, 2026 के ये चुनाव परिणाम कई मायनों में ऐतिहासिक और निर्णायक साबित हुए हैं। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन, तमिलनाडु में नए राजनीतिक चेहरे का उभार, असम में स्थिर जनादेश और केरल में बदलाव की स्पष्ट झलक—इन सबने मिलकर देश की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अब अगला फोकस सरकार गठन, गठबंधन की रणनीति और नए राजनीतिक समीकरणों पर रहेगा, जो आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर भी बड़ा असर डाल सकते हैं।

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