04 मई 2026

अमेठी में जमीन विवाद बना हिंसा की वजह, किसान की खड़ी फसल पर संकट

लेखक न्यूज़ डेस्क · 4 मई 2026, 13:47

अमेठी में जमीन विवाद बना हिंसा की वजह, किसान की खड़ी फसल पर संकट

अमेठी जिले के पीपरपुर थाना क्षेत्र के भेवई गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या एक किसान अपनी ही जमीन पर सुरक्षित है। यहां रहने वाले किसान राजकुमार पांडेय पिछले लगभग 20 वर्षों से एक बैनामा की गई जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी उन्होंने अपने खेत में गेहूं की फसल बोई, मेहनत की, समय पर सिंचाई और देखभाल की, जिसके बाद उनकी फसल पूरी तरह तैयार हो गई। लेकिन जब वह फसल काटने के लिए खेत पर पहुंचे, तभी गांव के ही शिव मिलन यादव ने उस जमीन पर अपना दावा जताते हुए उन्हें रोक दिया। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच कहासुनी से शुरू हुई बात मारपीट तक पहुंच गई। आरोप है कि शिव मिलन यादव और उनके साथियों ने राजकुमार पांडेय और उनके परिवार के लोगों के साथ मारपीट की, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज करते हुए शांति भंग की धारा में कार्रवाई की। पुलिस ने आरोपी पक्ष का चालान भी किया, लेकिन इससे विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि करीब एक सप्ताह बाद जब पुलिस नोटिस तामील कराने गांव पहुंची, तब भी स्थिति सामान्य नहीं रही और पुलिस व दूसरे पक्ष के बीच नोकझोंक हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अभद्रता के आरोप लगाए, जिसके बाद पुलिस को एक बार फिर शांति भंग की आशंका में कार्रवाई करनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित वह किसान है, जिसकी महीनों की मेहनत खेत में खड़ी है और कटाई के इंतजार में है। राजकुमार पांडेय अब अपनी फसल को बचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि जब तक राजस्व विभाग द्वारा जमीन का सीमांकन नहीं किया जाएगा, तब तक यह विवाद खत्म नहीं होगा और उन्हें अपनी ही जमीन पर खेती करने में दिक्कतें आती रहेंगी।

पीड़ित किसान ने SDM और DM से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द जमीन का सीमांकन कराया जाए, ताकि वह अपनी फसल की कटाई कर सकें और उनकी मेहनत बर्बाद न हो। वहीं स्थानीय पुलिस का कहना है कि उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की है और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस मामले का स्थायी समाधान प्रशासनिक स्तर पर सीमांकन कराए जाने में ही नजर आता है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण इलाकों में जमीन से जुड़े विवाद किस तरह गंभीर रूप ले सकते हैं और किसानों की आजीविका पर सीधा असर डाल सकते हैं। फिलहाल सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह कब तक इस विवाद का समाधान निकालकर किसान को न्याय दिला पाता है और उसकी खड़ी फसल को बर्बाद होने से बचा पाता है।

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