21 मई 2026

फर्जी वसीयत से 60 लाख की जमीन पर कब्जा, मेरठ मवाना तहसील में महिलाओं से मारपीट का आरोप

लेखक न्यूज़ डेस्क · 21 मई 2026, 15:31

फर्जी वसीयत से 60 लाख की जमीन पर कब्जा, मेरठ मवाना तहसील में महिलाओं से मारपीट का आरोप

मेरठ जिले की Meerut के अंतर्गत आने वाली Mawana Tehsil एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गई है। फर्जी वसीयत के आधार पर करीब 60 लाख रुपये मूल्य की जमीन के दाखिल-खारिज और कथित रूप से विरोध करने पहुंची महिलाओं के साथ मारपीट के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पूरा मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

जानकारी के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक संपत्ति से जुड़े उत्तराधिकार (विरासत) के मामले में कथित तौर पर फर्जी वसीयत के आधार पर जमीन का नामांतरण किसी तीसरे व्यक्ति के नाम कर दिया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया उस समय की गई जब मामला पहले से ही उच्च स्तर पर, यानी कमिश्नर कार्यालय में लंबित था। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कथित “सेटिंग और मिलीभगत” के जरिए दाखिल-खारिज की कार्रवाई पूरी कर दी गई।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें इस फैसले की जानकारी मिलने के बाद जब वे न्याय की मांग को लेकर मवाना तहसील पहुंचे, तो वहां उनके साथ अभद्रता की गई। आरोप है कि नायब तहसीलदार के पेशकार पर महिलाओं के साथ बदसलूकी और मारपीट करने तक के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस घटना के बाद तहसील परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

महिलाओं ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी बात प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रखनी चाही, तो उनकी शिकायत सुनने के बजाय उन्हें डराने और चुप कराने का प्रयास किया गया। पीड़ित पक्ष का यह भी कहना है कि पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों की भूमिका और प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

इस घटना के बाद इलाके में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर लोगों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि तहसील स्तर पर ही न्याय की प्रक्रिया इस तरह प्रभावित होगी, तो आम जनता को भरोसा कहां मिलेगा। वहीं, कई सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

फिलहाल पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी है और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाएगा। दूसरी ओर, तहसील प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यह मामला केवल एक जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें प्रशासनिक पारदर्शिता, न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर पर कथित भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे भी जुड़ गए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या पीड़ितों को वास्तव में न्याय मिल पाता है या नहीं।

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