मेरठ के रेलवे रोड थाना क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प और उसके बाद पुलिस अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोपों ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। बजरिया मोहल्ले में मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते पथराव, मारपीट और पुलिस प्रशासन पर सवालों तक पहुंच गया। इस घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज को लाइन हाज़िर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार रेलवे रोड थाना क्षेत्र के बजरिया मोहल्ले में मकान के लेनदेन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि नौशाद और शमीम पक्ष के बीच पहले कहासुनी हुई, जिसके बाद मामला मारपीट और पथराव तक पहुंच गया। दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान वहां से गुजर रहे दो भाई भी पत्थरबाजी की चपेट में आ गए और घायल हो गए।
घटना के बाद घायल युवक के भाई फईम ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। फईम का कहना है कि जब वह अपने घायल भाई को लेकर शिकायत दर्ज कराने के लिए केसरगंज चौकी पहुंचे, तब वहां मौजूद चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार नशे की हालत में थे। आरोप है कि चौकी इंचार्ज ने घायल युवक का मेडिकल कराने या उचित कार्रवाई करने के बजाय उसे दोबारा घटनास्थल पर भेज दिया। इससे इलाके में तनाव और अधिक बढ़ गया तथा हालात बिगड़ने लगे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक पुलिस की लापरवाही और कथित नशे की हालत में ड्यूटी करने की वजह से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। घटना की जानकारी फैलते ही लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला और रेलवे रोड थाने में हंगामा शुरू हो गया। बड़ी संख्या में लोग थाने पहुंच गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मेरठ के एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। जांच के दौरान रेलवे रोड थाना प्रभारी धीरज सिंह पर भी ड्यूटी के दौरान नशे में होने के आरोप लगे। हालांकि पुलिस प्रशासन ने इस मामले में अभी आधिकारिक रूप से मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन आरोपों ने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद मेरठ के एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने देर रात बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए रेलवे रोड थाना प्रभारी धीरज सिंह और केसरगंज चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार को तत्काल प्रभाव से लाइन हाज़िर कर दिया। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह के अनुसार नौशाद और शमीम पक्ष के बीच हुए इस विवाद में कुल नौ लोग घायल हुए हैं। एक पक्ष के चार और दूसरे पक्ष के पांच लोगों को चोटें आई हैं। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने दोनों पक्षों से तहरीर लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मेरठ की इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि यदि कानून व्यवस्था संभालने वाले अधिकारी ही लापरवाही या अनुशासनहीनता में लिप्त पाए जाते हैं, तो आम जनता का भरोसा कमजोर होता है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।