रामपुर में अतिक्रमण अभियान का असर: टूटे ढांचों से बेरोजगार हुए दुकानदारों के पुनर्वास की उठी मांग, BJP नेता फसाहत अली शानू बोले— “नई दुकानें बनाकर दी जाएं”

रामपुर।
पिछले दिनों शहर में चलाए गए व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान ने कई परिवारों की आजीविका पर गहरा असर डाला है। नगर प्रशासन द्वारा किए गए धुआंधार अभियान के तहत सड़कों, गलियों और प्रमुख बाज़ारों में मौजूद अनेक अवैध निर्माण को हटाया गया। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में छोटी-बड़ी दुकानें ढह गईं, जिसके कारण सैकड़ों दुकानदार अचानक बेरोजगार हो गए। अब अपने टूटे हुए ढांचों और उजड़े हुए व्यापार को देखकर ये लोग गहरी चिंता और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।

इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए भाजपा नेता फसाहत अली शानू सामने आए हैं। उन्होंने प्रशासन और नगर पालिका से यह मुद्दा मजबूती से उठाते हुए मांग की है कि जिन दुकानदारों की दुकानें तोड़ी गई हैं, उन्हें अविलंब दूसरी जगह दुकानें बनाकर उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे दोबारा अपने जीवन को पटरी पर ला सकें।

फसाहत अली शानू ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई के बाद सैकड़ों परिवार आर्थिक तंगी में पहुंच गए हैं। जिन लोगों की दुकानें टूटी हैं, वही दुकानें उनके पूरे परिवार का सहारा थीं। “दुकान टूटने से उनकी रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों के सामने खाने-पीने तक की समस्या पैदा हो गई है। इन लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है,” शानू ने कहा।

उन्होंने आगे कहा कि यह अभियान कानून व्यवस्था और शहरी व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से चलाया गया, लेकिन इसका असर सबसे ज्यादा उन गरीब और छोटे दुकानदारों पर पड़ा, जिनके पास न तो कहीं और दुकान खरीदने की क्षमता है और न ही किसी तरह की बचत। “हमारी यह स्पष्ट मांग है कि इन दुकानदारों को किसी वैकल्पिक स्थान पर नई दुकानें बनाकर दी जाएं, ताकि वे फिर से अपने कारोबार की शुरुआत कर सकें और अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें,” उन्होंने कहा।

“बहुत जल्द नगर पालिका अध्यक्ष से मिलेंगे”—शानू

भाजपा नेता फसाहत अली शानू ने बताया कि वे बहुत जल्द रामपुर नगर पालिका अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे और इस मुद्दे पर औपचारिक बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि वे दुकानदारों की वास्तविक स्थिति और उनके वर्तमान कठिन हालात से नगर पालिका प्रशासन को अवगत कराएंगे।

शानू का कहना है कि वह इस मुद्दे को सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन के उच्चाधिकारियों तक भी पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा, “हम इन गरीबों की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का काम करेंगे। किसी भी हाल में यह लोग अपनी आजीविका पूरी तरह से न खो दें, इसके लिए हमें मजबूत कदम उठाने होंगे।”

उन्होंने कहा कि अभियान के लिए प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन जनता—खासकर छोटे दुकानदार—भी शहर के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी सुरक्षा और भविष्य की चिंता करना भी उतना ही ज़रूरी है।

दुकानदारों में रोष और चिंता

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दुकान टूटने से प्रभावित कई दुकानदारों ने बताया कि वे वर्षों से उसी जगह पर अपना कारोबार कर रहे थे। अचानक दुकानें टूट जाने के बाद उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। कुछ दुकानदारों ने कहा कि बाजार में दुकानें खाली ही नहीं मिल रही हैं और अगर मिल भी जाएँ तो किराया इतना अधिक है कि उन्हें भरना उनके बस की बात नहीं।

उन्होंने प्रशासन से पुनर्वास की मांग दोहराते हुए कहा कि अगर उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर दुकानें उपलब्ध कराई जाती हैं तो वे अपना व्यापार फिर से शुरू कर पाएंगे।

समाजसेवी संगठन भी उतरे समर्थन में

कुछ स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी शानू की मांग का समर्थन किया है। संगठनों का कहना है कि अगर पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई तो शहर में गरीबी और बेरोजगारी और बढ़ जाएगी। दुकानदारों का कहना है कि सरकार और प्रशासन के सहयोग से ही वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे।

निष्कर्ष

रामपुर में अतिक्रमण विरोधी अभियान ने भले ही शहर को व्यवस्थित करने और यातायात सुचारू करने का रास्ता खोल दिया हो, लेकिन इससे गरीब और छोटे दुकानदारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भाजपा नेता फसाहत अली शानू द्वारा उठाई गई यह मांग अब शहर में चर्चा का विषय बन चुकी है कि क्या प्रशासन इन बेरोजगार हुए लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करेगा।

अगर प्रशासन और नगर पालिका इन दुकानदारों को नई दुकानें उपलब्ध कराने का ठोस निर्णय लेती है तो न केवल उनके परिवारों को बड़ा सहारा मिलेगा, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था भी धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकेगी। फिलहाल सभी की नजरें शानू और नगर पालिका अध्यक्ष की होने वाली बैठक पर टिकी हुई हैं।


Khursheed Khan Raju

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