लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने वृद्धावस्था पेंशन को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन पाने के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ प्रणाली के माध्यम से पात्र लोगों को स्वतः चिन्हित कर पेंशन स्वीकृत करेगी। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि इससे लाखों बुजुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने वृद्धजनों के लिए बड़ा कदम उठाते हुए पेंशन प्रक्रिया को पूरी तरह सरल बना दिया है। अब राज्य में पात्र वरिष्ठ नागरिकों को वृद्धावस्था पेंशन के लिए अलग से आवेदन भरने, दस्तावेज़ अपलोड करने या किसी भी प्रकार की औपचारिकता पूरी करने की जरूरत नहीं रहेगी।
समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि राज्य सरकार की फैमिली आईडी—एक परिवार, एक पहचान प्रणाली से स्वतः पात्र लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। फैमिली डाटा के आधार पर यह पहचान की जाएगी कि कौन-कौन नागरिक आयु, पात्रता और सामाजिक-आर्थिक मानकों को पूरा करता है।
🔹 कैसे मिलेगी पेंशन? – नई प्रणाली
- फैमिली आईडी डाटा से स्वतः पात्र वरिष्ठ नागरिकों की सूची बनेगी
- संबंधित व्यक्ति की सहमति ली जाएगी
- सहमति मिलते ही पेंशन अपने आप स्वीकृत हो जाएगी
- किसी भी तरह के आवेदन या दस्तावेज़ अपलोड करने की आवश्यकता नहीं
🔹 कितने लोग होंगे लाभान्वित?
फिलहाल प्रदेश के 67.50 लाख वरिष्ठ नागरिक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग भी हैं जो—
- आवेदन न कर पाने,
- तकनीकी प्रक्रिया न समझ पाने की वजह से योजना से वंचित थे।

नया फैसला ऐसे सभी पात्र लोगों को स्वतः प्रणाली में शामिल कर लाभ देने पर केंद्रित है।
🔹 सरकार का दावा है कि इस कदम से—
- पेंशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी
- किसी भी बिचौलिये की भूमिका खत्म होगी
- अधिकतम पात्र बुजुर्ग पेंशन से जुड़ सकेंगे
- राज्य में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी
इस फैसले को उत्तर प्रदेश में सामाजिक कल्याण प्रणाली के बड़े सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।