सुलतानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे चर्चित मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कथित टिप्पणी से जुड़े इस मामले में अब आवाज के नमूने की जांच को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अदालत द्वारा आवाज जांच की मांग खारिज किए जाने के बाद भाजपा नेता विजय मिश्र ने सेशन कोर्ट का रुख किया है, जिसके चलते फिलहाल मुख्य बहस टल गई है।
यह मामला वर्ष 2018 से जुड़ा हुआ है, जब सुलतानपुर जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र स्थित हनुमानगंज निवासी भाजपा नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिससे भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाएं आहत हुईं। तभी से यह मामला सुलतानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में विचाराधीन है।
गुरुवार को इस मामले में स्पेशल मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत में बहस होनी थी, लेकिन सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि राहुल गांधी की आवाज के नमूने की जांच कराने से जुड़ी अर्जी खारिज किए जाने के खिलाफ अब सेशन कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की गई है। इस नई कानूनी प्रक्रिया के चलते मुख्य मामले की बहस आगे नहीं बढ़ सकी।
दरअसल, परिवादी पक्ष ने 12 मार्च को अदालत में एक अर्जी देकर मांग की थी कि राहुल गांधी की आवाज का नमूना लिया जाए और उसकी जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल से कराई जाए। उनका दावा था कि कथित बयान की सत्यता और प्रमाणिकता की पुष्टि के लिए यह जांच जरूरी है। हालांकि अदालत ने 2 मई को इस मांग को खारिज कर दिया था।
अब भाजपा नेता विजय मिश्र ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर सुनवाई के लिए एमपी-एमएलए सेशन जज राकेश यादव की अदालत ने 30 मई की तारीख तय की है। वहीं मानहानि मामले की अगली सुनवाई स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट में 17 जून को होगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत आवाज के नमूने की जांच को मंजूरी देती है, तो यह मामले में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि याचिका खारिज होती है तो परिवादी पक्ष की रणनीति को झटका लग सकता है।
राहुल गांधी से जुड़े मामलों को लेकर देशभर में पहले भी राजनीतिक और कानूनी बहस होती रही है। ऐसे में सुलतानपुर की यह सुनवाई भी अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती जा रही है। फिलहाल सभी की नजर 30 मई को होने वाली सेशन कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि आवाज जांच की मांग पर अदालत क्या रुख अपनाती है।