16 मई 2026

सुलतानपुर : इंस्पेक्टर नीशू तोमर पर दुष्कर्म मामले की सुनवाई फिर टली, पीड़िता सिपाही की गैरहाजिरी बनी वजह

लेखक न्यूज़ डेस्क · 16 मई 2026, 16:01

सुलतानपुर : इंस्पेक्टर नीशू तोमर पर दुष्कर्म मामले की सुनवाई फिर टली, पीड़िता सिपाही की गैरहाजिरी बनी वजह

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले में इंस्पेक्टर नीशू तोमर पर लगे दुष्कर्म और यौन शोषण के गंभीर मामले की सुनवाई एक बार फिर आगे बढ़ गई। मामला एफटीसी प्रथम कोर्ट में चल रहा है, जहां शुक्रवार को निर्धारित गवाही और जिरह पूरी नहीं हो सकी। इसकी वजह पीड़िता महिला सिपाही का अदालत में उपस्थित न होना बताया गया।

यह मामला वर्ष 2022 का है, जब कोतवाली नगर थाना क्षेत्र में तैनात एक महिला आरक्षी ने इंस्पेक्टर नीशू तोमर के खिलाफ यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपों के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था और मामला धीरे-धीरे अदालत तक पहुंचा, जहां अब इसका ट्रायल चल रहा है।

शुक्रवार को एफटीसी प्रथम कोर्ट के जज विजय कुमार गुप्ता की अदालत में पीड़िता की शेष जिरह के लिए सुनवाई निर्धारित थी। अदालत में आरोपी पक्ष और अन्य संबंधित लोग मौजूद थे, लेकिन पीड़िता सिपाही अनुपस्थित रहीं। उनकी गैरहाजिरी के कारण गवाही की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।

बताया जा रहा है कि पीड़िता की जिरह पहले से ही लंबित चल रही थी और यह सुनवाई मामले में महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही थी। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख 26 मई तय की है और पीड़िता को उस दिन हर हाल में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं बल्कि पुलिस विभाग की आंतरिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी सवाल उठाता है। एक ओर जहां आरोपी इंस्पेक्टर पर गंभीर आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर पीड़िता की लगातार जिरह और कोर्ट प्रक्रिया का लंबा खिंचना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर लोगों की नजरें अदालत की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं। कई लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी होना चाहिए ताकि पीड़िता को समय पर न्याय मिल सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके।

फिलहाल, अदालत ने अगली सुनवाई 26 मई को निर्धारित की है, जिसमें पीड़िता की जिरह पूरी होने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना यह होगा कि इस बहुचर्चित मामले में आगे क्या मोड़ आता है और क्या न्याय की प्रक्रिया में तेजी आ पाती है या नहीं।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कानून के रखवाले ही आरोपी बन जाएं, तो न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कितना मजबूत रह पाता है।

 

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